कैपिटल पब्लिक स्कूल में धूमधाम से मना शिक्षक दिवस,बच्चों ने संभाली गुरुजनों की भूमिका
बदायूँ। कैपिटल पब्लिक स्कूल में शिक्षक दिवस उत्साह और धूमधाम के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में कक्षा एक से पांच तक के विद्यार्थियों ने अध्यापक-अध्यापिकाओं की भूमिका का गरिमापूर्ण अभिनय कर सभी का मन मोह लिया। बच्चों के लिए शिक्षक दिवस किसी त्योहार से कम नहीं रहा। विद्यार्थियों ने नृत्य, संगीत, नाटक, मिमिक्री और भाषण सहित विभिन्न प्रस्तुतियों के माध्यम से अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
कक्षा छह से आठ तक के विद्यार्थियों ने अपने शिक्षकों के सम्मान में सुंदर कार्ड, बुके, फोटो फ्रेम, पेन स्टैंड सहित विभिन्न आकर्षक उपहार स्वयं तैयार किए। बच्चों की रचनात्मकता और शिक्षकों के प्रति सम्मान की भावना ने कार्यक्रम को विशेष बना दिया।
प्रधानाचार्या मीनू सिंह ने शिक्षक दिवस के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए बताया कि वर्ष 1962 में डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के भारत के राष्ट्रपति बनने के बाद उनके कुछ पूर्व छात्रों ने उनका जन्मदिन मनाने के लिए उनसे संपर्क किया था। इस पर डॉ. राधाकृष्णन ने कहा था कि 5 सितंबर को उनका जन्मदिन मनाने के बजाय इस दिन को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाए तो यह उनके लिए सौभाग्य की बात होगी। तभी से भारत में प्रत्येक वर्ष 5 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है।
उन्होंने कहा कि शिक्षक हमारे जीवन में विशेष महत्व रखते हैं। वे विद्यार्थियों को जीवन जीने का तरीका, संघर्षों से लड़ने का गुण और सही मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। शिक्षक ही विद्यार्थियों को एक कुशल व्यक्ति के रूप में तैयार करते हैं, ताकि वे जीवन की विभिन्न समस्याओं का सामना करते हुए शिक्षित, विकसित और बेहतर इंसान बन सकें।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका है। हमारी संस्कृति में गुरु का स्थान भगवान से भी ऊपर माना गया है, क्योंकि गुरु ही भगवान तक पहुंचने का मार्ग दिखाता है। शिक्षकों की जिम्मेदारी केवल ज्ञान देना ही नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के चरित्र का निर्माण करना, उन्हें सामाजिक एवं नैतिक मूल्यों से परिचित कराना और मार्गदर्शन देकर अच्छा नागरिक बनाना भी है। विद्यार्थियों की प्रतिभा व जरूरतों को पहचानकर उन्हें व्यक्तिगत रूप से प्रेरित करना तथा उनकी गलतियों से सीखने के लिए सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना भी शिक्षक की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम को सफल बनाने में ममता सक्सेना, अमित जौहरी, रश्मि रानी, पूनम यादव, शीतेश गुप्ता, रूपा सक्सेना, प्रियंका भटनागर, दिव्या सिंह, कुमकुम, दीक्षा यादव, सृष्टि शर्मा, वंदना आदि का सराहनीय योगदान रहा।
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