बदायूँ में जल जीवन मिशन के लापता क्वालिटी इंजीनियर की रहस्यमयी मौत से सनसनी, दो दिन बाद शव मिला
बदायूँ। जनपद में जल जीवन मिशन के तहत कार्यरत पीएनसी इंफ्राटेक लिमिटेड चौपाल सागर के जूनियर इंजीनियर जितेंद्र सिंह चंदेल की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने पूरे मामले को रहस्य और विवाद के घेरे में ला दिया है। क्वालिटी चेकिंग के लिए निकले इंजीनियर का दो दिनों तक कोई सुराग नहीं लगा और रविवार शाम उनका शव कंपनी की बाइक सहित सड़क किनारे लगभग दस फीट गहरी खंती में बरामद हुआ। घटना के बाद जहां पुलिस प्रथम दृष्टया इसे सड़क दुर्घटना मानकर जांच कर रही है, वहीं परिजनों ने इस थ्योरी को सिरे से खारिज करते हुए सुनियोजित हत्या का आरोप लगाया है।मध्य प्रदेश के छतरपुर जनपद के नौगांव निवासी 28 वर्षीय जितेंद्र सिंह चंदेल वर्ष 2025 से पीएनसी इंफ्राटेक लिमिटेड के माध्यम से जल जीवन मिशन में क्वालिटी इंजीनियर के पद पर कार्यरत थे। वह बदायूँ स्थित कंपनी के चौपाल सागर कैंप कार्यालय में रहकर अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे थे।कंपनी के अधिकृत अधिकारी पवन कुमार वर्मा के अनुसार, 27 जून को जितेंद्र कंपनी की बाइक से थाना इस्लामनगर क्षेत्र के विक्रमपुर चौराहा एवं गांव चौसरा स्थित साइट पर क्वालिटी चेकिंग के लिए निकले थे। परिजनों का आरोप है कि वह ठेकेदार फैजान के साथ साइट पर गए थे, लेकिन इसके बाद उनका कोई पता नहीं चला। मोबाइल फोन लगातार बंद मिला। कंपनी और परिजनों ने अपने स्तर पर काफी तलाश की, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली। अंततः कंपनी की ओर से थाना बिनावर में गुमशुदगी दर्ज कराते हुए पुलिस से सर्विलांस के माध्यम से तलाश की मांग की गई।
रविवार शाम उझानी थाना क्षेत्र के गांव चाचीपुर स्थित भट्टे के पास सड़क किनारे लगभग दस फीट गहरी खंती से दुर्गंध आने पर राहगीरों ने ग्रामीणों को सूचना दी। ग्राम प्रधान के माध्यम से सूचना पुलिस तक पहुंची। मौके पर पहुंची पुलिस ने खंती से एक युवक का शव और कंपनी की बाइक बरामद की। पहचान के लिए बुलाए गए परिजनों ने शव की शिनाख्त लापता इंजीनियर जितेंद्र सिंह चंदेल के रूप में की। इसके बाद फोरेंसिक टीम ने घटनास्थल से महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे मृतक के बड़े भाई विनय सिंह चंदेल ने दुर्घटना की आशंका को पूरी तरह खारिज करते हुए गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि उनके भाई की हत्या सुनियोजित साजिश के तहत की गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि ठेकेदार फैजान सहित चार-पांच अन्य लोगों की भूमिका संदिग्ध है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। परिजनों का दावा है कि जितेंद्र बेहद ईमानदार अधिकारी थे और गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं करते थे। उनके अनुसार, कई बार उन्हें प्रभावित करने और खरीदने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने कभी गलत कार्यों का साथ नहीं दिया। परिजनों का आरोप है कि उनकी ईमानदारी ही उनकी मौत का कारण बनी।
उधर, कंपनी के सीईओ आलोक सिन्हा ने बताया कि मामले में पुलिस जांच कर रही है और पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। वहीं पुलिस का कहना है कि प्रथम दृष्टया मामला सड़क दुर्घटना का प्रतीत हो रहा है, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फोरेंसिक जांच और अन्य वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर ही मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा हो सकेगा। पुलिस का कहना है कि मामले के हर पहलू की गंभीरता से जांच की जा रही है और यदि किसी की भूमिका सामने आती है तो नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।
इधर, इस रहस्यमयी मौत ने जल जीवन मिशन से जुड़े कार्यों और इंजीनियरों की सुरक्षा को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। पूरे मामले पर अब सभी की निगाहें पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस जांच पर टिकी हैं, जिनसे यह साफ हो सकेगा कि यह दर्दनाक सड़क हादसा था या फिर किसी बड़ी साजिश का अंजाम।















































































