50 करोड़ के टेंडरों में अनियमितता का आरोप, ठेकेदार ने मुख्यमंत्री से जांच की मांग
बरेली। ग्रामीण अभियंत्रण विभाग में लगभग 50 करोड़ रुपये के निर्माण कार्यों की निविदाओं में भारी अनियमितता और भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए मोतीराम वर्मा ठेकेदार ने मुख्यमंत्री से उच्चस्तरीय जांच कराए जाने की मांग की है। शिकायतकर्ता मोतीराम वर्मा का आरोप है कि विभागीय अधिकारियों ने नियमों की अनदेखी कर निविदा प्रक्रिया को प्रभावित किया, जिससे सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ है।ग्राम मल्साखेड़ा, शीशगढ़ निवासी एवं पंजीकृत ठेकेदार मोतीराम वर्मा ने मुख्यमंत्री को दिए ज्ञापन में आरोप लगाया है कि ग्रामीण अभियंत्रण विभाग को विभिन्न निर्माण कार्यों के लिए लगभग 50 करोड़ रुपये का आवंटन मिला था। इनमें 40 लाख रुपये तक के कार्यों की निविदाएं अधिशासी अभियंता तथा 40 लाख रुपये से अधिक के 57 कार्यों की निविदाएं अधीक्षण अभियंता द्वारा आमंत्रित की गई थीं। आरोप है कि अधिकांश कार्यों में केवल दो-दो निविदाएं लेकर पूरी प्रक्रिया को पूर्व निर्धारित तरीके से संपन्न कराया गयाशिकायतकर्ता के अनुसार उनकी फर्म मैसर्स वर्मा कॉन्ट्रैक्टर ने 15 निर्माण कार्यों के लिए सरकारी अनुमानित दरों से लगभग 13 प्रतिशत कम दर पर निविदाएं दाखिल की थीं, जिससे सरकार को करीब 1.20 करोड़ रुपये का लाभ हो सकता था। इसके बावजूद उनकी निविदाओं को तकनीकी आधार पर निरस्त कर दिया गया और कार्य अनुमानित दरों पर आवंटित कर दिए गए।
मोतीराम वर्मा का आरोप है कि विभागीय अधिकारियों ने कई ठेकेदारों को निविदा प्रक्रिया में भाग न लेने के लिए दबाव बनाया और निविदा डालने पर ब्लैकलिस्ट करने की धमकी दी। इसके चलते अधिकांश ठेकेदारों ने निविदा नहीं डाली। उन्होंने दावा किया कि उनकी फर्म तथा कुछ अन्य फर्मों द्वारा डाली गई निविदाओं को बिना उचित कारण निरस्त कर दिया गया।
ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया है कि निविदा प्रक्रिया के दौरान आईटीबी के कई प्रावधानों का पालन नहीं किया गया। निविदाओं की सूची और तकनीकी मूल्यांकन रिपोर्ट निर्धारित समय पर पोर्टल पर अपलोड नहीं की गई। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि तकनीकी बोलियां अवकाश दिवस पर खोली गईं, जो नियमों के विपरीत है।
वर्मा ने बताया कि इस संबंध में उन्होंने 27 मई, 5 जून, 6 जून और 9 जून 2026 को जिलाधिकारी, मुख्यमंत्री, प्रमुख सचिव ग्रामीण अभियंत्रण विभाग, आयुक्त बरेली मंडल, मुख्य अभियंता सहित विभिन्न अधिकारियों को शिकायतें भेजीं, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
उन्होंने मुख्यमंत्री से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने तथा उनकी फर्म द्वारा प्रस्तुत कम दर वाली निविदाओं पर पुनर्विचार कर सरकारी हित में निर्णय लेने की मांग की है।
हालांकि, समाचार लिखे जाने तक ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के संबंधित अधिकारियों का पक्ष प्राप्त नहीं हो सका था। विभागीय प्रतिक्रिया मिलने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।















































































