ग्रामीणों का फूटा गुस्सा: पटपरागंज एमआरएफ सेंटर पर दोबारा कचरा डंपिंग शुरू, सैकड़ों ग्रामीण पहुंचे कोतवाली, बंद कराने की उठाई मांग
उझानी। कोतवाली क्षेत्र के ग्राम पटपरागंज स्थित एमआरएफ (मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी) सेंटर पर दोबारा नगर पालिका का कचरा डाले जाने से ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है। मंगलवार को पटपरागंज एवं मलिकपुर गांव के बड़ी संख्या में ग्रामीण प्रधान पति मनोज कुमार शाक्य के नेतृत्व में एकत्रित होकर उझानी कोतवाली पहुंचे और पुलिस को ज्ञापन सौंपकर एमआरएफ सेंटर को बंद कराने की मांग की।ग्रामीणों का आरोप है कि नगर पालिका परिषद उझानी द्वारा गांव में स्थापित एमआरएफ सेंटर पर लगातार कचरा डंप किया जा रहा है, जिससे आसपास के क्षेत्र में दुर्गंध फैल रही है और लोगों का जीवन प्रभावित हो रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि कचरे से उठने वाली बदबू के कारण गांव में रहना मुश्किल हो गया है तथा पर्यावरण और स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
प्रधान पति मनोज कुमार शाक्य ने बताया कि करीब एक वर्ष पूर्व भी ग्रामीणों ने इस समस्या को लेकर विरोध प्रदर्शन किया था, जिसके बाद जिलाधिकारी के निर्देश पर डंपिंग ग्राउंड को बंद करा दिया गया था। लेकिन अब नगर पालिका ने पुनः वहां कचरा डालना शुरू कर दिया है, जिससे ग्रामीणों में रोष बढ़ गया है।
ग्रामीणों ने चेतावनी देते हुए कहा कि गांव की सीमा में किसी भी कीमत पर नगर पालिका का कचरा नहीं डालने दिया जाएगा। समस्या के समाधान की मांग को लेकर बड़ी संख्या में ग्रामीण कोतवाली पहुंचे और पुलिस प्रशासन को ज्ञापन सौंपा।
ग्रामीणों की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए वरिष्ठ उपनिरीक्षक शिव कुमार ने नगर पालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी मणि जी सैनी एवं सफाई निरीक्षक हरीश त्यागी को मौके पर बुलाया तथा समस्या का शीघ्र निस्तारण कराने के निर्देश दिए।
वहीं नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी मणि जी सैनी ने बताया कि एमआरएफ सेंटर पर कूड़ा निस्तारण का कार्य कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पूर्व में एकत्रित कचरे को पूरी तरह समाप्त करने और उसका निस्तारण करने में लगभग डेढ़ माह का समय लगेगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि निर्धारित प्रक्रिया के तहत कूड़े के निस्तारण का कार्य कराया जा रहा है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि जनहित और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए एमआरएफ सेंटर पर कचरा डंपिंग तत्काल प्रभाव से रोकी जाए तथा स्थायी समाधान निकाला जाए।















































































