धर्मगुरु पंडित सुशील पाठक बोले- तौकीर रजा आदतन अपराधी, जेल में ही कटे जिंदगी
बरेली। बरेली दंगे के मुख्य आरोपी और इत्तेहाद-ए-मिलत काउंसिल (आईएमसी) के प्रमुख मौलाना तौकीर रजा की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उनकी जमानत याचिका को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उन्हें किसी भी तरह की राहत देने से साफ इनकार कर दिया। मौलाना तौकीर रजा पिछले साल 26 सितंबर से जेल में बंद हैं और इस फैसले के बाद उन्हें जेल की सलाखों के पीछे ही रहना होगा। इस बड़े फैसले के बाद बरेली के प्रमुख धर्मगुरु पंडित सुशील पाठक ने तौकीर रजा को आदतन अपराधी बताते हुए कहा कि ऐसे लोगों की जगह सिर्फ जेल में है और उन्हें आजीवन कारावास जैसी सख्त सजा मिलनी चाहिए ताकि शहर का माहौल दोबारा खराब न हो सके।
पंडित सुशील पाठक ने फैसले का किया स्वागत
मौलाना तौकीर रजा की जमानत याचिका खारिज होने पर धर्मगुरु पंडित सुशील पाठक ने अपनी तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस फैसले पर खुशी जताते हुए कहा कि मैं माननीय उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को हृदय से बधाई और धन्यवाद देता हूं कि ऐसे आदतन अपराधी की जमानत को खारिज किया गया। सुशील पाठक ने मांग की कि तौकीर रजा को अंदर ही रहना चाहिए और उसे आजीवन कारावास या एनएसए जैसी सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर वह बाहर आता तो बरेली का माहौल फिर से खराब हो सकता था।
पुलिस और जिला प्रशासन की सूझबूझ की तारीफ
धर्मगुरु पंडित सुशील पाठक ने बरेली के पुलिस और जिला प्रशासन की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि यह प्रशासन की मुस्तैदी और सूझबूझ का ही नतीजा था कि बरेली एक बड़े दंगे की आग में झुलसने से बच गई। उन्होंने विशेष रूप से तत्कालीन अधिकारियों का जिक्र करते हुए कहा कि अजय साहनी के रूप में जो आईजी हमें मिले और एसएसपी अनुराग आर्य की दृढ़ता के कारण दंगाइयों के मंसूबे कामयाब नहीं हो सके।
पोस्टर विवाद से भड़की थी हिंसा
इस पूरे विवाद की शुरुआत बरेली में ‘आई लव मोहम्मद’ पोस्टर विवाद को लेकर हुई थी। 26 सितंबर 2025 को इस विवाद के बाद मौलाना तौकीर रजा ने एक बड़े विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया था। उन्होंने मुस्लिम समुदाय से जुमे की नमाज के बाद भारी संख्या में इस्लामिया ग्राउंड में इकट्ठा होने की अपील की थी। इसके साथ ही उन्होंने प्रशासन को खुली चुनौती दी थी कि यदि उन्हें रोकने की कोशिश की गई, तो किसी भी अप्रिय घटना की जिम्मेदारी सरकार और स्थानीय प्रशासन की होगी।
अचानक बिगड़े थे शहर के हालात
तौकीर रजा की इस भड़काऊ अपील के बाद जुमे की नमाज खत्म होते ही बरेली के अलग-अलग इलाकों से हजारों की संख्या में लोग इस्लामिया ग्राउंड की तरफ बढ़ने लगे। देखते ही देखते पूरे शहर का माहौल तनावपूर्ण हो गया। बाजार आनन-फानन में बंद हो गए और सड़कों पर दहशत फैल गई। शहर के कई हिस्सों में भारी भीड़ जमा होने से कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई थी।
पुलिस पर हुआ था हमला और पथराव
पूरी तैयारी के साथ आए उपद्रवियों ने नमाज के ठीक बाद मोर्चा संभालते हुए पुलिस बल को निशाना बनाना शुरू कर दिया। पहले से तय रणनीति के तहत दंगाइयों ने पुलिस पर पथराव किया, हवाई फायरिंग की और आस-पास के इलाकों में तोड़फोड़ व लूटपाट मचाई। स्थिति को अनइलेक्ट्रॉनिक होता देख पुलिस प्रशासन ने दंगाइयों को खदेड़ने के लिए बल प्रयोग किया और लाठीचार्ज कर स्थिति पर बमुश्किल काबू पाया।
महीनों पहले रची गई थी बड़ी साजिश
पुलिस की शुरुआती जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि बरेली को दहलाने की यह साजिश कोई अचानक उपजी घटना नहीं थी, बल्कि इसकी प्लानिंग कई महीने पहले से की जा रही थी। तौकीर रजा वर्ष 2010 और 2012 में हुए बरेली दंगे की तरह ही एक बार फिर शहर को सांप्रदायिक आग में झोंकना चाहते थे। धर्मगुरु सुशील पाठक ने भी इस बात को दोहराया कि उनका पुराना प्लान पहले कामयाब रहा था, लेकिन इस बार पुलिस की मुस्तैदी ने उसे फेल कर दिया।
बरेली से फतेहगढ़ जेल किए गए शिफ्ट
दंगे में मुख्य भूमिका पाए जाने के बाद पुलिस ने मौलाना तौकीर रजा को इस पूरे बवाल का मुख्य सूत्रधार माना। उनके खिलाफ बरेली के अलग-अलग थानों में गंभीर धाराओं में 10 मुकदमे दर्ज किए गए। इसके बाद 26 सितंबर को ही पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। सुरक्षा कारणों को देखते हुए उन्हें पहले बरेली की सेंट्रल जेल ले जाया गया, लेकिन कुछ ही घंटों के भीतर बेहद गोपनीय तरीके से उन्हें फतेहगढ़ जेल में शिफ्ट कर दिया गया।
सरकारी वकील ने पेश किए मजबूत सबूत
स्थानीय अदालत से झटका मिलने के बाद तौकीर रजा ने हाईकोर्ट का रुख किया था। सुनवाई के दौरान तौकीर रजा के वकीलों ने दलील दी कि उनका इस दंगे से कोई सीधा सरोकार नहीं था और वे घटनास्थल पर मौजूद नहीं थे। इसके विपरीत, सरकारी वकील और बरेली पुलिस ने कोर्ट के समक्ष वीडियो फुटेज सहित बेहद पुख्ता और अकाट्य सबूत पेश किए, जिसमें तौकीर रजा मंच से लोगों को भड़काते नजर आ रहे थे। इन सबूतों के आधार पर अदालत ने उनकी जमानत याचिका को सिरे से खारिज कर दिया।
















































































