उर्स ए फरीदी के मौके पर शानदार तरही मुशायरे में शायरो ने पढ़े उम्दा कलाम,वाह वाही लूटी
बदायूं। हर साल की तरह इस साल भी बाबा फरीद के पोते कुतबे बदायूं मुफ्ती शाह मोहम्मद इब्राहिम फरीदी रहमतुल्लाह अलैहि के उर्स के मौके पर तरही मुशायरे का आयोजन हुज़ूर साहिबे सज्जादा हज़रत शाह मोहम्मद अनवर अली सुहैल फरीदी साहब की सदारत में किया गया । रात्रि दो बजे तक चले मुशायरे में जनपद, गैर जनपद,गैर प्रांत के शोअरा हज़रात द्वारा तरही नात ओ मनकबत पेश की गई।
सज्जादा हज़रत मोहम्मद अनवर अली सुहैल फरीदी ने फरमाया-
तेरा शाहना लाए फरीदी दूल्हा तुझे बनायेंगे, साथ में लाए तेरा पट्टा मुफ्ती इब्राहीम फरीदी।
उस्ताद शायर डॉ मुजाहिद नाज़ बदायूंनी ने कहा-
कहा ये मुस्कुराकर मरियम व हव्वा ने हूरों ने,
मुहम्मद की जो मां हैं वाकई वो आमना तुम हो।
वरिष्ठ शायर अहमद अमजदी ने पढ़ा-
आपका है नूरानी चेहरा मुफ्ती इब्राहीम फरीदी,
मेरी इन आंखों ने देखा मुफ्ती इब्राहीम फरीदी।
प्रसिद्द शायर डॉ शम्स मुजाहिदी बदायूंनी ने कहा-
कोई भी ग़म हो दुनिया का हर इक ग़म की दवा तुम हो,
मरीज़े लादवा के वास्ते दारूश शफा तुम हो।
डॉ यासीन उस्मानी ने पढ़ा –
सभी अहले नज़र ये कह रहे हैं मुत्तफिक होकर,
बदायूं में फरीदी सिलसिले की इक ज़िया तुम हो।
ई० वारिस रफी ने कहा-
हमे अब क्या ज़रूरत है ज़माने में तबीबों की,
मेरे सरकार बेशक हर मरज़ की इक दवा तुम हो।
मीरानपुर कटरा के मु०सलीम खां सलीम ने पढ़ा-
सुरागे मंज़िले मक़सूद बख्शा आदमियत को,
दिखाया जिसने सीधा रास्ता वो रहनुमा तुम हो।
अनवर खान फरीदी ने पढ़ा-
भटकते फिर रहे हैं जो अंधेरी राहों में मौला,
उन्हीं बे रहनुमाओं के लिए रौशन शमा तुम हो।
उस्मान आबिद जलालपुरी ने कहा –
आप के हाथों जब हो सौदा मुफ्ती इब्राहीम फरीदी,
फिर क्या देखूं महंगा सस्ता मुफ्ती इब्राहीम फरीदी।
डाक्टर दानिश बदायूंनी ने कहा –
वह जिसके नूर से हर एक आलम जगमगाता है,
वही नूरुलहुदा शम्शुद्दुहा बदरुद्दुजा तुम हो।
अब्दुल जलील फरीदी ने पढ़ा-
वो आखिर कौन है जिसने तुलू सूरज किया तुम हो,
सदा आई सदा आई मुहम्मद मुस्तफा तुम हो।
डॉ अकरम सिफत कटरवी ने पढ़ा –
शहंशाहे दो आलम हो हबीबे किबरिया तुम हो,
चमक पाते हैं जिसकी माहो अंजुम वो ज़िया तुम हो।
हाफ़िज़ मुकर्रम ने कहा –
हमें रोज़े क़यामत अपने दामन में छुपा लेना,
सरे महशर गुनाहगारों का इक आसरा तुम हो।
इनके अलावा सुहैब फरीदी, सऊद फरीदी,सगीर सैफी ने भी अपने कलाम पेश किए।
मुशायरे की निजामत (संचालन) मशहूर उस्ताद शायर डॉ मुजाहिद नाज़ क़ादरी बदायूंनी ने की।
आखिर में सलातो सलाम के बाद मुल्क व कौम की तरक्की और खुशहाली के लिए दुआ की गई। सभी को तबर्रुक तकसीम किया गया।














































































