हिंदू-मुस्लिम एकता की खूबसूरत मिसाल: सैकड़ों लोगों ने एक साथ किया रोजा-इफ्तार
बरेली। पुराने शहर में जगतपुर रोड स्थित आयशा पैलेस के पास रमजान के पाक महीने में हिंदू-मुस्लिम एकता की खूबसूरत मिसाल देखने को मिली। अखिल भारतीय अब्बासी वेलफेयर एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष शारिक अब्बासी के नेतृत्व में रमजान के 21वें रोजे पर जरूरतमंदों के लिए भव्य इफ्तार का आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों लोगों ने एक साथ रोजा खोला।इफ्तार कार्यक्रम में हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोग बड़ी संख्या में शामिल हुए और सभी ने मिलकर रोजेदारों के साथ बैठकर इफ्तार किया। इस दौरान भाईचारे और आपसी सद्भाव का अनोखा माहौल देखने को मिला। आयोजकों ने रोजेदारों को खजूर, फल, शरबत और अन्य खाद्य सामग्री वितरित की।जिला अध्यक्ष शारिक अब्बासी ने बताया कि हर साल रमजान के महीने में संगठन की ओर से जरूरतमंदों की मदद के लिए इफ्तार कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। उन्होंने कहा कि रमजान का महीना इंसानियत, सब्र और नेकी का पैगाम देता है। ऐसे कार्यक्रम समाज में प्रेम और भाईचारे को मजबूत करते हैं।उन्होंने बताया कि इस आयोजन के पीछे संगठन के प्रदेश अध्यक्ष मुकित अब्बासी का मार्गदर्शन और प्रेरणा रही। उनके निर्देश पर संगठन समय-समय पर समाज सेवा के कार्यक्रम चलाता रहता है, जिससे जरूरतमंद लोगों को मदद मिल सके और समाज में एकजुटता का संदेश जाए।कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पूर्वी मंडल अध्यक्ष जयदीप चौधरी और मंडल महामंत्री सचिन वर्मा मौजूद रहे। इसके अलावा चंद्रपाल राठौर, नमन मिश्रा, अविनाश मिश्रा, मोहम्मद हसीब, तारिक कुरैशी, नूरुद्दीन शब्बू, मोहम्मद समीर, मोहम्मद शानू आलम, शफातुल्लाह, शोएब, भइये गुलाम खान, काशिफ रजा, मुनीर रजा, आमिर रिजवान, मोहम्मद यासीन सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।इस मौके पर वक्ताओं ने कहा कि रोजा रखना अल्लाह की इबादत है, जो इंसान को धैर्य, तकवा और नेकी की राह पर चलना सिखाता है। वहीं रोजेदार को इफ्तार कराना भी बड़ी नेकी मानी गई है। ऐसे आयोजन न सिर्फ लोगों की भूख मिटाते हैं, बल्कि दिलों को भी जोड़ने का काम करते हैं।













































































