ईरान पर हमलों के बाद भारत की अपील, संयम और कूटनीति पर दिया जोर
नई दिल्ली। ईरान पर अमेरिका और इस्राइल के ताजा हमलों के बाद भारत सरकार की पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है। विदेश मंत्रालय ने शनिवार को जारी बयान में कहा कि भारत, ईरान और खाड़ी क्षेत्र में हाल के घटनाक्रमों को लेकर गहरी चिंता व्यक्त करता है और क्षेत्र में तेजी से बढ़ते तनाव पर नजर बनाए हुए है।
विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में सभी पक्षों से संयम बरतने, तनाव बढ़ाने से बचने और आम नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की अपील की। मंत्रालय ने स्पष्ट कहा कि हालात को नियंत्रित करने और मूल मुद्दों के समाधान के लिए संवाद और कूटनीतिक प्रयासों को ही आगे बढ़ाया जाना चाहिए। भारत ने यह भी दोहराया कि सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान अंतरराष्ट्रीय शांति और स्थिरता के लिए अनिवार्य है।
सरकार ने बताया कि क्षेत्र में स्थित भारतीय मिशन वहां रह रहे भारतीय नागरिकों के संपर्क में हैं और समय-समय पर आवश्यक परामर्श जारी किए जा रहे हैं। भारतीय नागरिकों को सतर्क रहने, दूतावासों और मिशनों के संपर्क में बने रहने तथा स्थानीय सुरक्षा दिशा-निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है।
ईरान पर हमलों और खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव का भारत पर भी व्यापक असर पड़ सकता है। यदि संघर्ष लंबा खिंचता है तो देश की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता पर दबाव बढ़ सकता है। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी क्षेत्र से आयात करता है और अनुमानित रूप से 40 से 60 प्रतिशत तेल आपूर्ति होर्मुज जलडमरूमध्य के मार्ग से होकर आती है। इस मार्ग पर किसी भी प्रकार का सैन्य अवरोध या अस्थिरता तेल आपूर्ति को प्रभावित कर सकती है, जिससे घरेलू बाजार में कीमतों और महंगाई पर असर पड़ने की आशंका है।
खाड़ी देशों में 80 लाख से अधिक प्रवासी भारतीय निवास करते हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना और आवश्यकता पड़ने पर संभावित निकासी की व्यवस्था करना भी भारत सरकार के सामने बड़ी चुनौती के रूप में उभर सकता है। वर्तमान हालात में भारत संतुलित कूटनीतिक रुख अपनाते हुए शांति और स्थिरता की दिशा में प्रयासों पर जोर दे रहा है।













































































