हिंदी दिवस पर केवल खुराना को समर्पित अशोक खुराना की पुस्तक का भव्य विमोचन हुआ

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बदायूं। शहर के जोगीपुरा स्थित गुरुद्वारा हाल में आज हिंदी दिवस पर आई.पी.एस. केवल खुराना को समर्पित अशोक खुराना द्वारा रचित पुस्तक “दोहे शिक्षाप्रद” का विमोचन समारोह मेवाराम चौधरी की अध्यक्षता में आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ सरिता चौहान नें सरस्वती वंदना पढ़कर किया। साहित्यकार अशोक खुराना की पुस्तक ‘दोहे शिक्षाप्रद’ का विमोचन वरिष्ठ साहित्यकारों, राजनीतिज्ञों एवं विद्वानों की उपस्थिति में संपन्न हुआ। इस अवसर पर मुख्य अतिथि पूर्व मंत्री एवं सदर विधायक महेश चन्द्र गुप्ता ने कहा कि अच्छी सोच के धनी सरल स्वभाव के मालिक अशोक खुराना जी की पुस्तक में जीवन की सरलता और आचरण की पवित्रता का संगम है। इस पुस्तक के दोहों से शिक्षा लेते हुए हम सभी को जीवन व्यतीत करना चाहिए।

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मुख्य वक्ता भाजपा जिला अध्यक्ष राजीव गुप्ता ने अशोक खुराना जी की किताब दोहे शिक्षाप्रद को बेमिसाल और अनमोल बताया। विशिष्ट अतिथि बिल्सी विधायक हरीश शाक्य ने अशोक खुराना को बधाई देते हुए कहा की पुस्तक के दोहे हृदय पर गहरा प्रभाव डालते हैं और व्यक्ति को अपने जीवन के बारे में सोचने पर मजबूर करते हैं। यह दोहे निश्चित ही समाज को एक अच्छी दिशा प्रदान करेंगे। एसपी सिटी डॉक्टर बिजेंद्र द्विवेदी ने किताब में उद्धृत ये पंक्तियां पढ़ी- जीवन एक किताब है, जिसके पृष्ठ अनेक।
इन पर अंकित कीजिए, कार्य सुमंगल नेक।
उन्होंने कहा इन पंक्तियों को आई.पी.एस. केवल खुराना ने अपने जीवन में चरितार्थ किया।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. बृजेश कुमार सिंह ने कार्यक्रम के सफलता की बधाई दी।
एसपी सिटी ने पुस्तक की प्रशंसा करते हुए कहा के अशोक खुराना की यह पुस्तक प्रेरणादायक दोहों से सुसज्जित है। पुस्तक के दोहे निश्चित ही हमारे जीवन को शिक्षा प्रदान करेंगे।
शरद शंखधार ने कहा कि अशोक खुराना की किताब कविता की अनमोल धरोहर है, शब्दों में संवेदना का भाव है।
संचालन कर रहे भूराज सिंह राज लॉयर ने पंक्तियां पढ़ी-
हिंदी अगणित भाषाओं के नंदन वन का चंदन है।
यही प्रणय की मधुर कल्पना यही मनोगत क्रंदन है।
हिंदी ने ही किया अलंकृत भावों की अभिव्यक्ति को,
हिंदी नि:संदेह भारत के हृदय का स्पंदन है।
वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. राम बहादुर व्यथित ने पढ़ा-
हिंदी है भारत माँ की भारत की पहचान है हिंदी
राष्ट्र-चेतना की मेंहदी है गांधी का अरमान है हिंदी
कार्यक्रम आयोजक वरिष्ठ साहित्यकार अशोक खुराना ने सभी लोगों का आभार व्यक्त करते हुए ये पंक्तियां पढ़ी-
कुछ बिछुड़न की पीर कुछ, मिलने की मुस्कान।
सुख-दुख के आंसू लिखे, पुस्तक में श्रीमान।।

कार्यक्रम में आई.पी.एस केवल खुराना को समर्पित दो अन्य किताबों देहरादून के वरिष्ठ कवि अंबर खरबंदा की पुस्तक “क्या अर्ज़ करूं” तथा युवा साहित्यकार सतेन्द्र द्वारा लिखित “पंचायत सहायक” का भी विमोचन किया गया। मंचासीन साहित्यकारों में मथुरा से आए डॉक्टर अनिल गहलौत, कासगंज से आए राम प्रकाश पथिक, बिसौली से आए डॉक्टर सतीश शर्मा सुधांशु, बिल्सी से आए नरेंद्र गरल, वरिष्ठ कवि महेश मित्र, बरेली से आए डॉक्टर नितिन सेठी तथा संघ के जिला प्रचारक भरत जी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में मुख्य रूप से डॉ.बी.आर गुप्ता, डॉ अजीत पाल सिंह, डॉ. सी.के जैन, सुशील धींगड़ा, सचिन भारद्वाज, विनोद सक्सेना बिन्नी, शमसुद्दीन शम्स, डी.के चड्डा, सुषमा कथूरिया, हरिप्रताप सिंह राठौर, दिलीप जौहरी एड., आशु बंसल, रंजीत राठौर, वेदभानु आर्य, राम प्रकाश शास्त्री, उज्जवल वशिष्ठ, सुभाष बत्रा, कमल आहूजा, गिरधारी लाल, विष्णु देव चाणक्य, शिव स्वरुप गुप्ता, सरिता चौहान, भीमसेन सगर, गिरीश जुनेजा, अनवर आलम, अमृत गांधी, विजय मेहंदीरत्ता, राजेश गुप्ता, जगदीश धींगड़ा, अरविंद गुप्ता, संजय कुमार पाठक, रवि भूषण पाठक, राजवीर सिंह राठौर, विवेक खुराना समेत जनपद व बाहर से आए मूर्धन्य साहित्यकारों, गणमान्य व्यक्तित्वों, पंचायत सहायकों एवं मातृशक्ति की उपस्थिति में यह कार्यक्रम संपन्न हुआ।

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