बदायूँ क्लब में हिन्दी दिवस की पूर्व संध्या पर दिवंगत हिन्दी साहित्यकारों की श्रद्धांजलि में तर्पण कार्यक्रम हुआ
बदायूं।बदायूँ क्लब की ओर से हिन्दी दिवस की पूर्व संध्या पर एवं श्राद्ध पक्ष में एक अनूठा कार्यक्रम आयोजित किया। जिसमें हिन्दी जगत के जनपद के मूर्धन्य दिवंगत साहित्यकारों की श्रद्धांजलि में तर्पण नाम से उन्हें कवितओं द्वारा श्रद्धांजलि दी गई और याद किया गया। कार्यक्रम में दिवंगत साहित्यकारों के परिजनों को सम्मानित भी किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि नगर विधायक महेश चन्द्र गुप्ता, विशिष्ट अतिथि भा.ज.पा. जिलाध्यक्ष राजीव कुमार गुप्ता, पुलिस अधीक्षक ग्रामीण डाॅ. ह्देश कठेरिया, प्रख्यात कवि एवं उत्तर प्रदेश साहित्य सभा के संस्थापक सर्वेश अस्थाना, कार्यक्रम अध्यक्ष वरिष्ठ साहित्यकार नरेन्द्र गरल ने मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्जवलित कर एवं पुष्प अर्पित कर शुभारम्भ किया। डाॅ. सोनरुपा विशाल द्वारा सरस्वती वन्दना प्रस्तुत की गई। इस अवसर दिवंगत साहित्यकारों स्व. चन्द्र प्रकाश दीक्षित, स्व. हसीब सोज, स्व. नूर ककरालवी, स्व. फहमी बदायूँनी, स्व. टिल्लन वर्मा, स्व. गीताजंलि सक्सेना, स्व. वहील उल्लाह खां, स्व. उमेश चन्द्र पाठक, स्व. केवल खुराना, स्व. शराफत समीर, एवं स्व. विशाल गाफिल को मरणोपरान्त हिन्दी भाषा एवं साहित्य साधना के हिन्दी सेवी सम्मान से सम्मानित किया गया। सभी के परिजनों एवं शुभचिन्तकों को शाॅल उड़ाकर, प्रतीक चिन्ह देकर अतिथियों द्वारा सम्मानित किया गया। इस अवसर मुख्य अतिथि नगर विधायक महेश चन्द्र गुप्ता ने कहा, हिन्दी केवल भाषा नहीं ये हमारा आत्मा है, जो हमें हमारी संस्कृति का बोध कराती है, भाषा के उत्थान के लिए साहित्यकारों द्वारा किये गये कार्य सदैव याद रहते हैं। भा.ज.पा. जिलाध्यक्ष राजीव कुमार गुप्ता ने कहा, बदायूँ जनपद साहित्य और अदब की धरती है, यहां के कवियों और शायरों ने विश्व भर में जनपद को गौरव प्रदान किया है, हिन्दी के उत्थान में इस धरती का योगदान सदैव अमर है। विशिष्ट अतिथि पुलिस अधीक्षक ग्रामीण डाॅ. ब्रजेश कठेरिया ने कहा, बदायूँ का नाम साहित्य और संस्कृति के लिए कोने-कोने में जाता है, आने वाली पीढ़ी को हिन्दी भाषा के विकास और उद्भव के कार्य करना चाहिए। प्रख्यात कवि सर्वेश अस्थाना ने कार्यक्रम के लिए डाॅ. अक्षत अशेष को बधाई देते हुए कहा, कि व्यक्तित्व के अमरत्व के लिए ऐसे श्रेष्ठ आयोजन बहुत आवश्यक है, जो इन पुष्यात्माओं द्वारा किये गये विशेष कार्य का चिर बनाते हैं, उन्होंने अपने चिर परिचित अंदाज में कविताओं से हिन्दी के महत्व पर प्रकाश डाला और कवितायेे भी प्रस्तुत की। कार्यक्रम में अध्यक्षता कर रहे नरेन्द्र गरल ने कविता द्वारा कहा, जो गीतों की प्यास लिए अम्बर के तारे बन बैठे, दृग की गंगा जली सजा कर उ नका तर्पण करते हैं। इस अवसर पर स्थानीय कवियों और दिवंगत कवियों के परिजनों द्वारा उनकी प्रसिद्ध रचनायें पढ़ कर उन्हें याद किया। कार्यक्रम के संयोजक क्लब के सचिव डाॅ. अक्षत अशेष ने कहा, तर्पण उन पुष्यात्मों को है जो अर्पण निज भाषा को कर गये। अशोक खुराना ने अपने पुत्र आई.पी.एस. अधिकारी स्व. केवल खुराना की पंक्तिया पढ़ते हुए कहा, जन्म बदायॅंू में दिया दाता का आभार, देवभूमि से भी मिला मुझे असीमित प्यार। डाॅ. सोनरुपा विशाल ने स्व. हसीब सोज़ का शेर पढ़ते हुए कहा, यहां मजबूत से मजबूत लोहा टूट जाता है, कई झूठे इक्ठ्ठे हो सच्चा टूट जाता है। दिवाकर वर्मा ने कहा, बेटी विदा हुई क्या घर से पापा रिश्तेदार हो गए। कुमार आशीष ने कहा, कुछ यहां रह जायेंगी और कुछ वहां रह जायेंगी, जिन्दगी की हसरतें बनकर धंुआ रह जायेंगी। फरहत हुसैन ने कहा, आज आए समीर कल आए, जिस घड़ी मौत का वो पल आए, हो कफन मेरा तीन रंगो का और होठों पे गंगाजल आए। नूर ककरालवी साहब को याद करने हुए सोहराब ककरालवी ने कहा, हम अहले फन हैं, हमें शोहरतों से क्या मतलब। वहीदउल्ला खां के बेटे ने कहा, जर्द मौसम में बहारों का निज़ाम आया है, मुझ को हैरत है हरीफों का सलाम आया है। चन्द्र प्रकाश दीक्षित की रचना पढ़ते हुए भारत शर्मा ने कहा, झूठी बातों से बहलेगा कया ये दिल बहलाने से, बात उसी को समझााओं जो समझ जाए समझाने से। फहमी बदायॅंूनी की रचना पढ़ते हुए श्रीदत्त शर्मा ने कहा, पूछ लेते वो बस मिज़ाज मेरा, कितना आसान था इलाज मेरा। उमेश चन्द्र पाठक के पुत्र दिशान्त पाठक ने रचना पढ़ी। अभिषेक अनंत ने कहा, निर्मल मर का दर्पण है ये, श्रद्धायुक्त समर्पण है ये, साहित्यिक पुण्यात्माओं हित श्रद्धांजलि है तर्पण है ये। कार्यक्रम में आयोजन के स्वागताध्यक्ष आल इण्डिया ज्वैलर्स एसोसियेशन के जिलाध्यक्ष जितेन्द्र महाजन, दीपक सक्सेना, रविन्द्र मोहन सक्सेना, सूरज कुमार, नितिन गुप्ता, सोमेन्द्र कुमार, इकबाल असलम,रवि भूषण पाठक, पंकज शर्मा, राहुल चौबे, नितेश वाष्र्णेय, इजहार अहमद, भारतेंदु मिश्रा आदि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन रविन्द्र मोहन सक्सेना और अभिषेक अनंत ने किया एवं आभार डाॅ. अक्षत अशेष ने किया।













































































