दातागंज में भाजपा नेता डॉ शैलेश पाठक की निःशुल्क भोजन सेवा बनी इंसानियत की मिसाल

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दातागंज। देश के विभिन्न हिस्सों में प्रकृति की आपदाओं से जूझ रहे लोगों के लिए सामूहिक सेवा कार्य अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। इसी कड़ी में भाजपा नेता डॉ शैलेश पाठक का बाढ़ पीड़ितों के लिए निःशुल्क भोजन सेवा कार्य मानवता की अनूठी मिसाल बनकर उभरा है। बदायूं जिले के दातागंज क्षेत्र में रामगंगा नदी के बढ़ते जलस्तर से प्रभावित कई ग्रामवासियों की मदद के लिए डॉ शैलेश पाठक ने अपनी निजी पूंजी से चलाए जा रहे राहत शिविर के माध्यम से निःशुल्क भोजन सेवा को व्यवस्थित किया है। यह सेवा दिन प्रतिदिन बढ़ती संख्या में पीड़ितों को भोजन उपलब्ध कराकर सामाजिक संवेदनशीलता का परिचायक बन गई है।बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर हालात का लिया जायजा ,डॉ शैलेश पाठक ने आज सुबह अपने राहत शिविर पहुंचने से पहले रामगंगा नदी की बाढ़ से प्रभावित दर्जनों ग्रामों का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने गांववासियों से मिलकर उनके हालात जाना और उनके आवश्यकताओं के बारे में बातचीत की। उन्होंने पीड़ितों से भली-भांति सम्पर्क साधा और सुनिश्चित किया कि राहत कार्य प्रभावी एवं पर्याप्त रूप से चलाया जा रहा है। साथ ही उन्होंने प्रभावित लोगों से यह भी वादा किया कि उनकी सहायता निरंतर जारी रहेगी, जिससे हर व्यक्ति को भूखे पेट न सोना पड़े। शिविर में प्रतिदिन हजारों पीड़ितों को वितरित हो रहा भोजन डॉ शैलेश पाठक के कटरा स्थित राहत शिविर में प्रतिदिन हजारों बाढ़ पीड़ितों को निःशुल्क भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। शुरुआत से ही यह शिविर पीड़ितों के लिए सुरक्षित आश्रय व भोजन का केंद्र बना हुआ है। आज भी सामान्य दिनों की तुलना में अधिक संख्या में पीड़ित भोजन के लिए शिविर पहुंचे। राहत शिविर में पौष्टिक भोजन तैयार कर इसे सभी जरूरतमंदों तक पहुंचाने का कार्य बड़ी अनुशासनबद्धता से संपन्न हो रहा है। डॉ शैलेश पाठक स्वयं शिविर में उपस्थित रहकर कार्य की गुणवत्ता का निरीक्षण कर रहे हैं। प्रत्येक व्यक्ति को स्नेह व सम्मान से भोजन परोसने का विशेष ध्यान रखा जा रहा है ताकि सभी पीड़ित आत्मसम्मान के साथ भोजन प्राप्त कर सकें। सामाजिक जिम्मेदारी का निर्वहन – निजी खर्च से चल रहा राहत शिविर डॉ शैलेश पाठक का यह कदम सामाजिक जिम्मेदारी व मानवता के प्रति गहरी प्रतिबद्धता का प्रमाण है। उन्होंने इस राहत शिविर की स्थापना व संचालन के लिए अपनी निजी आय से आवश्यक संसाधनों का प्रबंध किया है। उनका उद्देश्य सिर्फ आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि प्रभावित लोगों के लिए सहारा बनकर कठिन समय में साथ देना है। उनके प्रयासों से यह शिविर न केवल भोजन वितरण का केंद्र बन गया है, बल्कि एक ऐसा स्थान भी बन गया है जहां पीड़ित आश्रय व सहयोग पा रहे हैं। राहत शिविर में भोजन प्राप्त करने आए ग्रामवासियों ने डॉ शैलेश पाठक के इस मानवतावादी प्रयास की भरपूर सराहना की। उन्होंने बताया कि ऐसी सेवा के कारण उन्हें कठिन समय में राहत मिल रही है। पीड़ितों का कहना था कि भोजन के साथ-साथ उन्हें सम्मान व संवेदना भी मिल रही है, जिससे उनके मनोबल में वृद्धि हो रही है। कई लोगों ने यह भी कहा कि डॉ शैलेश पाठक की सेवा कार्य ने उन्हें यह विश्वास दिलाया है कि कठिन समय में भी समाज का कोई न कोई सदस्य उनके साथ खड़ा है। डॉ शैलेश पाठक ने कहा कि इस राहत अभियान का उद्देश्य केवल वर्तमान संकट से निपटना नहीं है, बल्कि इसे स्थायी सेवा कार्य में परिवर्तित कर बाढ़ प्रभावित व अन्य आपदाग्रस्त क्षेत्रों में भी विस्तारित किया जाएगा। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि आने वाले दिनों में स्वास्थ्य जांच शिविर, साफ-सफाई अभियान, और अस्थायी आवास निर्माण कार्य भी किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त, उन्होंने सरकार से अपील की कि सामाजिक कार्यों को बढ़ावा दिया जाए और आवश्यकतानुसार सहायता उपलब्ध कराई जाए। डॉ शैलेश पाठक का यह कार्य समाज के प्रत्येक व्यक्ति के लिए प्रेरणास्त्रोत है। आज के व्यस्त व व्यक्तिगत लाभ की दुनिया में ऐसे सेवा कार्य हमें याद दिलाते हैं कि मानवता की सबसे बड़ी शक्ति सेवा भावना है। उनके निःस्वार्थ प्रयास से यह स्पष्ट होता है कि विपत्ति के समय में भी यदि समाज के जिम्मेदार नागरिक आगे आएं, तो हजारों लोगों की जिंदगी में उम्मीद की किरण जगाई जा सकती है।

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