गुरुपूर्णिमा पर खाटूश्याम मंदिर में विशाल भंडारा

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बरेली। श्यामगंज स्थित श्री शिरडी साईं खाटूश्याम सर्वदेव मंदिर में गुरुपूर्णिमा के पावन अवसर पर विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। मंदिर परिसर भक्ति, सेवा और श्रद्धा से सराबोर नजर आया। काकड़ आरती से हुई शुरुआत, पूजा-पाठ का रखा गया विशेष क्रम सुबह ठीक 6 बजे मंदिर में काकड़ आरती के साथ दिनभर चलने वाले भक्ति आयोजनों की शुरुआत हुई। मंदिर के महंत पंडित सुशील पाठक ने बताया कि आरती के बाद भगवान गणेश, गायत्री माता, दत्तात्रेय और साईंनाथ जी की पूजा की गई। इसके बाद बाबा साईंनाथ का महाभिषेक विधिपूर्वक संपन्न हुआ।पूजन के बाद विशेष हवन और श्रृंगार आरती का आयोजन हुआ। मंदिर परिसर में घंटियों की गूंज और भजनों की मधुर स्वर लहरियों ने माहौल को भक्ति से भर दिया। आरती के बाद विशाल भंडारा आयोजित किया गया जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। गुरुपूर्णिमा के मौके पर राष्ट्रीय ब्राह्मण सेवा संस्थान की ओर से मंदिर के महंत पंडित सुशील पाठक, जय नारायण शर्मा इंटर कॉलेज के पूर्व प्राचार्य ब्रजमोहन शर्मा और तुलसीराम शर्मा का सम्मान किया गया। संस्था के पदाधिकारियों ने माला, शॉल और सम्मान पत्र देकर उन्हें श्रद्धा के साथ सम्मानित किया। इस कार्यक्रम में शहर की कई जानी-मानी हस्तियों ने भाग लिया। बरेली के महापौर डॉ. उमेश गौतम, नीलिमा पाठक, धर्मेन्द्र सिंह तोमर संजय आयलानी, डॉ. विनोद पगरानी, अनिल कुमार सक्सेना, वरिष्ठ भाजपा नेता रामगोपाल मिश्रा, बिजेंद्र शर्मा, ममता शर्मा, रीता शर्मा, अंकुर गुप्ता, अंकुर कक्कड़, संजय कालरा, प्रदीप राजानी, गौरव अरोड़ा, संजीव दुबे, शोभा अग्रवाल, अनुपम टिबड़ेवाल, विशाल अरोड़ा और सर्वेश रस्तोगी जैसे तमाम गणमान्य लोग कार्यक्रम में पहुंचे और बाबा साईंनाथ का आशीर्वाद लिया गुरुपूर्णिमा का यह पर्व गुरु की महत्ता को समर्पित होता है, और आज का आयोजन उसी परंपरा को सजीव करता नजर आया। मंदिर परिसर में पूरा दिन भजन, कीर्तन और सेवा कार्य चलते रहे। श्रद्धालुओं ने बाबा के दरबार में माथा टेक कर अपनी आस्था प्रकट की और प्रसाद पाकर खुद को धन्य माना। मंदिर की ओर से सुरक्षा, स्वच्छता और व्यवस्था के व्यापक इंतजाम किए गए थे। हर कोने में श्रद्धालुओं की सेवा के लिए स्वयंसेवक मुस्तैद दिखे। भंडारे में खिचड़ी, पूड़ी, सब्जी, हलवा जैसे व्यंजनों का वितरण हुआ। गुरु पूर्णिमा हिंदू पंचांग के अनुसार आषाढ़ मास की पूर्णिमा को मनाई जाती है। यह दिन गुरु के प्रति श्रद्धा, सम्मान और आभार प्रकट करने का प्रतीक है। मान्यता है कि इसी दिन आदि गुरु महर्षि वेदव्यास का जन्म हुआ था, जिन्होंने वेदों का विभाजन कर उन्हें व्यवस्थित रूप दिया और महाभारत जैसी महान रचना की।
भारतीय संस्कृति में गुरु को ईश्वर से भी ऊपर स्थान दिया गया है। कहा भी गया है: “गुरु ब्रह्मा गुरु विष्णु, गुरु देवो महेश्वरः।
गुरु साक्षात परब्रह्म, तस्मै श्री गुरवे नमः॥” इसका अर्थ है – गुरु ही ब्रह्मा, विष्णु और महेश हैं। गुरु ही परम ब्रह्म हैं। ऐसे गुरु को नमन है। आत्मिक और व्यावहारिक जीवन की राह दिखाते हैं गुरु गुरु न केवल आध्यात्मिक ज्ञान देते हैं, बल्कि जीवन में धैर्य, अनुशासन, सेवा, और सही दिशा भी दिखाते हैं। इस दिन शिष्य अपने गुरु को प्रणाम कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। कई जगहों पर भजन, कथा, पूजन और भंडारे का आयोजन कर समाज को एकजुट किया जाता है।

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