जीव मात्र के कल्याण का साधन श्रीमद् भागवत कथा: आचार्य श्याम बिहारी

बरेली । जनकपूरी स्थित श्री हर मिलाप शिव शक्ति मंदिर में चल रही, श्रीमद् भागवत कथा में, श्री धाम वृंदावन से पधारे आचार्य श्याम बिहारी चतुर्वेदी ने, द्वितीय दिवस की कथा सुनाते हुए बताया है, कि सभी जीवो का एक ही उद्देश्य है की श्रीमद् भागवत कथा श्रवण करना, इसी प्रसंग में आगे की कथा सुनाते हुए परीक्षित की जन्म की कथा को सुनायी, उन्होंने कहा कि परीक्षित बड़े ही प्रतापी और सेवाभावी राजा थे, अपनी प्रजा की सेवा अपने संतान के सम करते थे, एक दिन राजा परीक्षित भ्रमण के लिए गए, तो उन्होंने क्या देखा की एक बैल जिसके तीन पैर काट दिए हैं और एक गाय जो, उस बैल की दशा देखकर के रो रही है, यह दृश्य परीक्षित दूर से देख रहे थे, गाय कोई और नहीं साक्षात् पृथ्वी है, बैल कोई और नहीं यह धर्म है, यह प्रसंग धर्म और पृथ्वी का है, धर्म रूपी बैल कहता है, गाय रूपी पृथ्वी से, हे देवी तुम क्यों इतना रो रही हो, क्या तुम्हारा कोई प्रिये तुम्हें छोड़कर के दूर चला गया है, उसकी याद करके रोती हो, पृथ्वी ने कहा मेरे रोने का कारण है, कि जब पृथ्वी पर धर्म की वृद्धि होती है, तब मुझे अत्यंत प्रसन्नता होती है, और जब धर्म का लोप होने लगता है, तो मुझे बड़ा कष्ट होता है, आज की स्थिति में धर्म आलोप होता जा रहा है, विधर्मी लोग बढ़ते जा रहे हैं, आगे मेरा क्या हाल होगा यही सोच करके मैं बार-बार रो रही हूं, इतने में एक काला, काला पुरुष कलयुग के रूप में आता है, और गाय बैल को मारने लगता है, परीक्षित ने देखा कि मेरे राज्य में गाय और बैल को सता रहा है, परीक्षित ने अपने तरकश से बाण निकाल करके धनुष पर चढ़ा लिया है, और कहा तुम कौन हो मेरे राज्य में और गाय बैल को क्यों तकलीफ दे रहे हो, परीक्षित ने जब उसको ललकारा तो उसे घबरा गया उसने कहा कि हम कलयुग हैं, मेरा समय आ गया है ,आप रहने के लिए हमें कुछ स्थान दे दीजिए, परीक्षित ने चार स्थान दिए, जहां पर जुआ खेला जाता है, वहां तुम्हारा निवास है जहां वेश्यावृत्ति हो वहां तुम्हारा निवास है, जहां पर मार काट हिंसा होती है वहां तुम्हारा निवास है,मदिरा पान हो बहा रहो, कलयुग ने कहा यह स्थान मेरे लिए अच्छे नहीं है, एक स्थान अच्छा दे, पांचवा स्थान स्वर्ण में दिया जो अन्याय से कमाया गया सोना है, उसमें तुम्हारा निवास है अन्याय के मुकुट पर परीक्षित के मुकुट में कलयुग बैठ गया है, और परीक्षित दोष दर्शन करने लगे हैं, समीक के आश्रम जाकर के उनका अपराध कर दिया है, गले में मरा हुआ सांप डाल करके चले गए, बेटे श्रृंगी ने देखा कि मेरे पिता का अपमान किया है, तो श्रृंगी ने श्राप दे दिया, जिस परीक्षित ने हमारे पिता को अपमानित किया है, उसको आज से सप्तम दिवस में तक्षक के डसने से उनकी मौत हो जाएगी जब पिताजी ने जब समाधि खोलकर देखा मरा हुआ सांप तो बाहर डाल दिया ,परीक्षित ने जो मुकुट उतार करके घर जाकर के देखा तो कलयुग का असर कम हुआ है, रोने लगे मैंने यह क्या कर दिया, समीक के सामने उनका बेटा श्रृंगी रो रहा था, समीक ने पूछा क्या बात है, बेटा बोला महाराज परीक्षित आपको अपमानित करके गए हैं, कोई बात नहीं भोजन पानी की याचना कर रहे थे लेकिन आप समाधि में थे और उन्होंने आपका अपमान किया है, कोई बात नहीं बेटा वह हमारे राजा है, तुमने और कुछ तो नहीं बोला , बोले मैंने आज से सप्तम दिवस में रक्षक के डसने से उनकी मौत होगी, श्राप दे दिया है, बोले यह तुमने ठीक नहीं किया है तब जाकर के समीप ने एक गौरमुख नाम के शिष्य को भेजा है, और गोरमुख नाम के संदेश दिया , आज से सप्तम दिवस में आपको तक्षक के डसने आपकी मृत्यु हो जाएगी, गुरुदेव का आदेश है, कि आप अपने उपाय कर ले, उसी क्षण परीक्षित सब कुछ त्याग करके अपनी पत्नी से विदा लेकर के और अपने बेटा जन्मेजय को राज्य देकर के सुखताल पर पहुंचे, सुखताल पर शुकदेव जी महाराज का आगमन हुआ, वहां पर शुकदेव जी महाराज से उन्होंने कहा जिसकी मृत्यु निकट में है उसे क्या करना चाहिए, और सदा सर्वदा जीव को क्या करना चाहिए, तब शुकदेव जी ने बताया, प्रत्येक जीव का कल्याण का साधन, श्रीमद् भागवत की कथा इसलिए जीवन में भागवत की कथा अवश्य सुनना चाहिए, इसी के द्वारा इस भवसागर से जीव पार हो सकता है, इस मौके पर भजन गायक जगदीश भाटिया, दीपक भाटिया, सुनील मिश्रा, अमित, केशव मिश्रा, राजेश, निर्मला देवी, विनोद खंडेलवाल, श्याम दीक्षित और भी दूर-दूर से श्रोता समुदाय पहुंच रहे हैं।