ऑटिज्म समस्या से ग्रसित बच्चों के प्रबन्धन-अभिभावकों के लिए कार्यशाला का आयोजन किया गया ।
बरेली । आईएमए हॉल में जीवनधारा पुनर्वास एवं शोध संस्थान व आईएमए, के संयुक्त तत्वाधान सें आयोजन किया गया। अभिभावकों के लिए आयोजित कार्यशाला का उद्घाटन संस्थान के चेयरमैन प्रो (डा) अमिताव मिश्रा, आईएमए , बरेली के अध्यक्ष डा राजीव गोयल, डा राका चावला एवं संस्थान की निदेशिका शाश्वती नंदा संयुक्त रूप से दीप प्रज्जवलित करकें किया। इस अवसर पर 50 से अधिक अभिभावकों एवं जीवनधारा पुनर्वास एवं शोध संस्थान के डिसेबिलिटी एक्सपर्ट एवं विशेष शिक्षक आदि मौजूद रहें। जीवनधारा पुनर्वास एवं शोध संस्थान के चेयरमैन प्रो (डा) अमिताव मिश्रा ने बताया कि विगत कुछ वर्षों से ऑटिज्म से ग्रसित बच्चों की संख्या लगातार बढ रही हो जो चिन्ताजनक है। डा० अमिताव मिश्रा ने यह राय दी कि ऐसे बच्चों के अभिभावकों को ऑटिज्म से उत्पन्न होने वाले सभी समस्याओं को अच्छे से समझना चाहिए और विशेषज्ञों से प्राप्त परामर्श के अनुसार थैरेपी एवं घरेलू प्रशिक्षण प्रदान करना चाहिए। एक दिवसीय कार्यशाल विभिन्न सत्रों में आदि पर परिचर्चा हुई। ऑटिज्म बच्चों के पर डा० अमिताव मिश्रा ने बताया कि ऑटिस्टिक बच्चों में जो भी समस्याएं होती है। उनमें होता है। इन बच्चों के का आंकलन एक प्रशिक्षित एक्सपर्ट से ही कराना चाहिए।

तो थैरेपिस्ट को दोनो परिस्थितियों में अलग-अलग प्रशिक्षण देना चाहिए।इसी तरह उन्होने \ पर अभिभावको को आसान एवं सरल तरीके की युक्ति के माध्यम से समझाया तथा अभिभावको के मन में जो कि डाउट थे उनका निस्तारण किया।डॉ राजीव गोयल, अध्यक्ष आईएमए ने कहा कि मेडिकल सर्विस में विगत वर्षों में ऐसे बच्चों की निदान और चिकित्सा को लेकर अनेक प्रगति हुई है परन्तु पुनर्वास के क्षेत्र में जो प्रगति हम अर्न्तराष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय शोध पत्रिका में पढ़ते है, वो हमारे जीवनधारा में देखने पर मिल जाता है और यह संस्थान अत्याधिक क्रियाओं की नयी-नयी जानकारी दिलाता है।कार्यशाला के सफल आयोजन के लिए संस्थान की निदेशिका शाश्वती नन्दा ने पुनर्वास अधिकारी एकराम सिंह, प्रशासक हर्ष चौहान, विपिन सक्सेना, फुरकाना नाज, अर्शी, वैशाली रायजादा, अजमी सुल्ताना, हुदा, भावना, शिरि, प्रियमवडा, सोनल भाटिया, प्रीति गंगवार, रूकसार, ममता दिवाकर, हेमा चौहान, फारिया, मोहम्मद गौहर अब्बास, रेहान, सचिन सिंह, शिवेन्द्र चौहान, राहुल, निकिता, भावना, विष्णु, अमित विश्वकर्मा एवं धीरेन्द्र पाल समन्वयक, डी एड विशेष शिक्षा (आई डी डी एवं एच आई ) आदि के सहयोग की सरहाना की।













































































