अयोध्या से रामेश्वरम तक रामनाम के संकल्प के साथ चली शिप्रा पाठक ने पूरी की 3952 किमी की पद यात्रा

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नई दिल्ली। 27 नवंबर को अयोध्या से रामेश्वरम तक जाने वाली शिप्रा पाठक की 4000 किलो मीटर की राम जानकी पद यात्रा आज हजारों राम जानकी भक्तों की उपस्थिति में संपन्न हुई। आपको बताते चलें दो दिन पहले तमिलनाडु में शिप्रा की पद यात्रा को कुछ असामाजिक तत्वों ने रोकने का प्रयास करते हुए रामेश्वरम भगवान में जल अर्पित ना करने की चेतावनी देते हुए कहा कि यहाँ राम नहीं चलेंगे। धीरे धीरे सोशल मीडिया के माध्यम से तमिलनाडु में आग की तरह ये समाचार फैल गया जिसके परिणामस्वरूप हजारों राम भक्त पद यात्रा में पहुंच गए।शिप्रा ने सरयू, गंगा, यमुना, सरस्वती, नर्मदा, इंद्राणी, मंदाकिनी, तुंगभद्रा, कृष्णा,गोदावरी और वैगई जैसी दर्जनों प्रमुख नदियों से भगवान रामेश्वरम का जलाभिषेक किया।माँ जानकी जी के बाद वॉटर वुमन शिप्रा इस पद यात्रा को करने वाली भारत की पहली महिला है। इनकी यह पद यात्रा उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़,महाराष्ट्र,कर्नाटक होकर तमिलनाडु पहुंची। सभी राज्यों में शिप्रा का हजारों राम जानकी भक्तों ने भव्य स्वागत किया।इस पद यात्रा को सबसे बड़ा जनसमर्थन तमिलनाडु राज्य में मिला जहां हिंदी भाषी जनसमुदाय न होने के बावजूद भी सैकड़ो ग्रामों में शिप्रा के पैरों को पुष्प जल के साथ चरण पूजन कर आदर सत्कार किया गया।तमिलनाडु राज्य में पहली बार राम के नाम पर निकली किसी यात्रा को इतना बड़ा जनसमर्थन मिला है।

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शिप्रा के रामेश्वरम पहुंचने पर भारतीय जनता पार्टी के दर्जनों जिलाध्यक्ष,राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख पदाधिकारियों,समेत अयोध्या,प्रयागराज,जबलपुर,अमरकंटक,नाशिक,हम्पी,रामटेक,विजयपुरा से से भी बड़ी संख्या में रामभक्त पहुंच गए।शिप्रा की इस पद यात्रा से पूरे भारत से लाखों लोग जुड़े गये है। शिप्रा इस पद यात्रा को सोशल मीडिया के माध्यम से राम जानकी के दुर्गम मार्गों का पूरे भारत को दर्शन करा रहीं है।इसके अलावा उन्होंने राम जानकी वन गमन मार्ग पर लगभग 500 बड़े संवाद एवम सैकड़ो छोटे संवाद किए जिनके माध्यम से उन्होंने लोगों को नदियों के प्रति राम जानकी की संवेदना को बताते हुए कहा श्री राम ने अपने वन मार्ग में दर्जनों प्रमुख नदियों को स्पर्श किया।उन्होंने अपने वन मार्ग के चयन में जल,जंगल,जीव जंतु,पहाड़ सभी को पूज्यनीय बताया।शिप्रा ने मातृ शक्ति को भी माता जानकी के चरित्र को आत्मसात करने की प्रेरणा देते हुए कहा कि जानकी माता ने अयोध्या के राज पाठ को छोड़कर श्री राम के साथ वन गमन मार्ग को चुनकर अपनी वीरता का परिचय दिया।उन्होंने बताया जानकी ने बिना पिता के संरक्षण के अपने बेटों को अच्छा पालन पोषण दिया।ऐसी माता को आज की मातृ शक्तियों को आत्मसात करना चाहिए।शिप्रा ने इस वन गमन यात्रा के माध्यम से भारत में लगभग 20 भव्य रामजंकी वाटिका लगाने की भी संकल्पना की है।

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