रमजान के पहले जुमे को अक़ीदत के साथ अदा की गई जुमे की नमाज

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कोरोना काल के चलते सीमित संख्या मे ही मस्जिदों मे पहुंचे नमाज़ी
सहसवान । करोना काल के चलते माह-ए-रमजान के  पहले जुमे को लेकर रोजेदार खास तैयारियों में जुटे । मौलानाओं ने कोरोना संक्रमण काल में घरों में ही नमाज अदा करने की अपील की है। मस्जिदों में सीमित संख्या में ही नमाज अदा की गई । वहीं दिनभर भूख-प्यास की शिद्दत बर्दाश्त कर रोजेदारों ने अल्लाह की इबादत में माह-ए-रमजान का तीसरा  दिन लू और तपिश मे  गुजारा। घरों में महिलाओं ने इफ्तारी की तैयारियों के साथ ही इबादत में भी वक्त इबाद्त मे गुजारा । जामा मस्जिद के इमाम कारी खलीकुरहमान  ने बताया  कि सहरी के समय उठना और सहरी करना सुन्नत है ,अगर सहरी नहीं करते हैं तो रोजा़ हो जाएगा, लेकिन सुन्नत रह जाएगी।

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कोरोना संक्रमण के इस काल में घर मे रहकर इबादत कर कोरोना से मुक्ति की दुआ करें।। उन्होने लोगों से अपील की है कि  कोरोना वायरस के संक्रमण के चलते जुमे की नमाज घरों में ही अदा करें। इसी के चलते ज़्यादातर लोगों ने जुमे की नमाज अपने घरों मे ही अदा की और एक सीमित संख्या लोग मस्जिद मे पहुंचे । इस रमजान के पाक महीने मे हम सब मिलकर गरीबों और मजलूमों की मदद  करें। मोलाना  ने आगे  कहा  कि जिले में कोरोना महामारी का कहर जारी है जिसके मद्देनजर ज़्यादातर लोग इस वर्ष भी रमजान माह में मस्जिदों की बजाय  नमाज़ी तरावीह की विशेष नमाज घरों पर ही अदा कर रहे हैं । इस्लामी मान्यता के अनुसार माहे रमजान को अन्य महीनों से ज्यादा अजमत और बरकत वाला माना गया है । कहा जाता है कि इस माह में की गई खुदा की इबादत बाकि महीनों से अफजल होती है, यही कारण है कि रमजान के पहले दिन से ही हर कोई अपने रब को मनाने के लिए घरों पर ही सजदे में सिर झुका रहा है । 

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