साहित्यिक संस्था ‘शब्दिता’ के तत्वावधान में कविता गोष्ठी का आयोजन हुआ
बदायूं। साहित्यिक संस्था ‘शब्दिता’ के तत्वावधान में कविता गोष्ठी का आयोजन किया गया।
सभी सदस्याओं ने
नवरात्र के उपलक्ष्य पर आयोजित इस गोष्ठी में ‘स्त्री और उसके विभिन्न किरदार’ विषय के अनुरूप रचनाएँ पढीं।
सभी ने स्त्री जीवन के विविध पक्षों पर आधारित विषय पर अपनी अपनी रचनाएँ सुनाईं।

सरस्वती वंदना से कार्यक्रम का आरंभ हुआ।सरस्वती वंदना नन्ही सी बिटिया वैभवी विजय गुप्ता ने की।
तदुपरांत गोष्ठी प्रारम्भ हुई ।






इस अवसर पर कवयित्री, लेखिका दीप्ति जोशी गुप्ता ने एक सुंदर कविता का पाठ किया।कविता का शीर्षक था-
हिम पुत्रियाँ
जिसके लहू की धार से
अभिसिंचित होता है बुरांश, और बिखर जाती है लाल फूलों की रंगत
यूं ही जंगल-जंगल अज्ञात।…
ये पहाड़नें भी ना! बड़ी अजीब होती हैं।
जब तक ठोकी-पीटी नहीं जाती,
उनमें वो कुछ खास, कुछ अलग वाली बात नहीं आती।
कवयित्री डॉ गायत्री प्रियदर्शनी ने कहा-
अधजगी सी
टूटी उचटी नींद में
सपना देखती हैं आँखें
मधु राकेश ने एक सुंदर भजन का पाठ किया –
मेरे गीत की लाइनें हैं
मैया दर्शन देना हमारे अंगना।।
ऐरी मैया अमुवा को विरवा हमारे अंगना ।
मधु अग्रवाल ने बहुत प्रभावशाली वक्तव्य दिया,उन्होंने कहा-
नारी शक्ति है सम्मान है
नारी गौरव है अभिमान है
नारी ने ही ये रचा विधान है
नारी शक्ति को शत् शत् प्रणाम वो
कवयित्री उषा किरण रस्तोगी ने कुछ इस तरह अपनी बात रखी
कौन कहता है निगाहों के जुबां होती नहीं
यह तो राजे दिल का भी राज कह सुनाती हैं
वरिष्ठ लेखिका ममता नौगरिया ने वर्तमान में बढ़ती अपसंस्कृति के हवाले से अपने विचार रखे –
नारी हीरा है पुरुष लोहा युवा पीढी को समझना होगा कि नारी ही ऐसी शक्ति है जो सिर्फ और सिर्फ कुदरत ने महिलाओं को दी है वही संसार की रचियता है वही घर परिवार की धरोहर है नारी चाहे तो घर को स्वर्ग बना सकती है चाहे नरक । नारी वो हीरा है जो कुदरत ने काफी सोच विचार के साथ नारी को सौपी है युवा पीढी संस्कार संस्कृति को पहचाने उसको अपना कर बच्चों का भविष्य सुखमय बनाए.
कार्यक्रम का संचालन कर रहीं कवयित्री डॉ शुभ्रा माहेश्वरी ने पढ़ा –
कभी तरंग, कभी उमंग, तो कभी मधुर लाली है वो।
कभी दुर्गा ,कभी कमला, कभी शारदे, कभी काली है वो।।
घर की बगिया सजा के, खुशियां सजा दे ,
ऐसी मधुरम स्वर्णिम आभा वाली डाली है वो।।
संस्था की सबसे छोटी सदस्या कशिश गुप्ता ने मेरिटल रेप पर पढ़ा –
ये सब कुछ नया नहीं,
कुछ गलत नहीं |
जिस्मानी होकर ही रूहानी हुआ जाता है,
ये कहा जाता है
वो कदम पीछे भी ले तो,
व्याह इसीलिए ही तो रचाया जाता है
ये कहा जाता है ||
डॉ. निशि अवस्थी ने कहा –
संसार की रचना का मूल सार है नारी। धरती को विधाता का पुरस्कार है नारी।
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सभी ने संस्था की नई सदस्य डॉ.इंदु शर्मा का स्वागत किया।
काव्य गोष्ठी का संचालन डॉ.शुभ्रा माहेश्वरी ने किया।
इस अवसर पर मंजुल शंखधार,मधु शर्मा,डॉ उमा सिंह गौर, सरिता चौहान उपस्थित रहीं।
शब्दिता संस्था की संस्थापिका डॉ. सोनरूपा विशाल ने सभी का आभार व्यक्त किया।















































































