बौद्धिक संपदा अधिकार संगोष्ठी में“छात्रों को बताया पेटेंट फाइल करने का तरीका”

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शाहजहांपुर।एस0एस0 कॉलेज के वाणिज्य विभाग में “बौद्धिक संपदा अधिकार” विषय पर चल रहे तीन दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार के तीसरे और अंतिम दिन श्री शंकर मुमुक्षु विद्यापीठ की प्रधानाचार्य डॉ0 संध्या ने की-नोट स्पीकर के रूप में बोलते हुए कहा कि भारत जैसे विकासशील देशों में नवीन खोजों की अत्यधिक आवश्यकता है। अतः बौद्धिक संपदा अधिकार के क्षेत्र में छात्रों के पास करने को बहुत कुछ है यदि छात्र शोध-दृष्टिकोण अपनाए तो उनके मन में स्वत: एक प्रश्न उत्पन्न होगा कि ऐसा क्यों? यही प्रश्न उन्हें नवाचार के लिए प्रेरित करेगा । नवाचार छात्रों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाएंगे ही साथ ही देश के विकास में भी उपयोगी होंगे। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की विशेषज्ञ डॉ0 संध्या ने आगे बोलते हुए कहा कि शिक्षा, चिकित्सा, कृषि, इनफॉरमेशन टेक्नोलॉजी, साइबर सिक्योरिटी, उत्पादन केंद्रों आदि सभी क्षेत्रों में आजकल डेटा प्रोटेक्शन और इसकी सहायता से शोध करने वालों की आवश्यकता होती है। जिसके लिए बौद्धिक संपदा अधिकार कानून की जानकारी रखने वाले लोगों की मांग की जाती है। अतः इन सभी क्षेत्रों में छात्रों के लिए रोजगार के अच्छे अवसर हैं। डॉ0 संध्या ने यह भी बताया कि यदि छात्र कोई नई खोज या उत्पाद तैयार करते हैं तो वो उसका पेटेंट कराने के लिए किस प्रकार आवेदन करेंगे और किस प्रकार ट्रेडमार्क तथा कॉपीराइट आदि विषयों पर व्यावहारिक रूप से काम करेंगे।
विशिष्ट अतिथि रोहिलखंड विश्वविद्यालय, बरेली के क्षेत्रीय अर्थशास्त्र विभाग की प्रो0 रुचि द्विवेदी ने छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि कि भारत की बौद्धिक क्षमता पर कोई संदेह नहीं है। जब आधुनिक विमानों का आविष्कार भी नहीं हुआ था तब भारत के पास पुष्पक विमान था। रामायण और महाभारत काल में तकनीकी रूप से आज के विश्व से ज्यादा समृद्ध था। किंतु प्राचीन साहित्य के विलुप्त हो जाने और विदेशियों द्वारा निरन्तर लूट ने हमारे ज्ञान को हमारी की आंखों से ओझल कर दिया। वस्तुत: आज जितनी भी खोजें हो रही है उन सब का उल्लेख हमारे धर्म ग्रंथों में ऋषि-मुनियों द्वारा किया जा चुका है। अत: आवश्यकता है कि आधुनिक शोध केंद्रों में प्राचीन संस्कृत साहित्य के गहन अध्ययन की व्यवस्था की जाए और भारतीय समृद्ध ज्ञानकोष का लाभ उठाने के लिए छात्र छात्राओं को संस्कृत पढ़ने के लिए प्रेरित किया जाए ताकि युवा पीढ़ी भारतीय परिस्थितियों के अनुसार भारतीय बौद्धिक संपदा का प्रयोग करके नवाचार कर सकें।
सेमिनार में मुख्य अतिथि रोहिलखंड विश्वविद्यालय के व्यवसायिक प्रशासन विभाग कि आचार्य तथा आईआईसी प्रकोष्ठ की अध्यक्ष प्रो0 तूलिका सक्सेना ने कहा कि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नवीन राष्ट्रीय नीति के अंतर्गत बौद्धिक संपदा अधिकार पर विशेष ध्यान दिया गया है। नई नीति के अंतर्गत विश्वविद्यालयों में आईआईसी अर्थात “इंस्टिट्यूशन इनोवेशन सेल” की स्थापना की जा रही है। इस प्रकोष्ठ का कार्य विद्यार्थियों को नवाचार के लिए प्रेरित करना और उनका सहयोग करना है। यह प्रकोष्ठ ना केवल विद्यार्थियों की सहायता करेगा बल्कि जनपद तथा आसपास के क्षेत्रों के लघु एवं मध्यम उद्यमियों को भी परामर्श देने, मार्गदर्शन करने एवं उनका सहयोग करने का कार्य करेगा। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का आईआईसी प्रकोष्ठ महाविद्यालयों में भी अपने केंद्र खोल सकता है। प्रो0 तूलिका ने महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो0 आजाद तथा वाणिज्य विभागाध्यक्ष डॉ0 अनुराग के समक्ष आईआईसी केंद्र महाविद्यालय में खोलने का प्रस्ताव रखा, जिससे सहर्ष स्वीकृति प्रदान की गई। प्राचार्य डॉ आजाद ने कहा कि अक्टूबर माह में केंद्र का संचालन प्रारंभ किया जाएगा। जिसका प्रभारी डॉ0 अनुराग अग्रवाल को बनाया जाएगा। डॉ0 जागृति गुप्ता के संचालन में हुए कार्यक्रम के अंत में सेमिनार संयोजक डॉ0 के0 के0 वर्मा ने धन्यवाद ज्ञापित किया । बृज लाली, अपर्णा त्रिपाठी और प्रतीक्षा मिश्रा ने राष्ट्रगान प्रस्तुत किया। राष्ट्रगान के बाद सेमिनार समाप्ति की घोषणा की गई। समापन कार्यक्रम में डॉ0 देवेंद्र सिंह, डॉ0 कमलेश गौतम, डॉ0 गौरव सक्सेना, डॉ0 विजय तिवारी, डॉ0 जगदीश कुमार, डॉ0 अजय वर्मा, डॉ0 सचिन खन्ना, डॉ0 संतोष प्रताप, डॉ0 रूपक श्रीवास्तव, श्री प्रकाश कुमार वर्मा, डॉ0 बरखा सक्सेना, डॉ0 पदमजा मिश्रा, डॉ0 पूजा बाजपेई, डॉ0 अरुण कुमार यादव, डॉ0 धर्मवीर सिंह, अंकुर अवस्थी, तुषार रस्तोगी, मनीष कुमार, अखिलेश कुमार आदि उपस्थित रहे।

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