देहरादून। आपदाग्रस्त क्षेत्रों का दौरा करने के बाद जौलीग्रांट हवाईअड्डे पर मीडिया से बातचीत करते हुए केंद्रीय मंत्री सिंह ने कहा कि क्षतिग्रस्त एनटीपीसी की परियोजना में काम करने वाले मृतकों के आश्रितों को 20-20 लाख रुपये की आर्थिक मदद दी जाएगी इस आपदा में 13.2 मेगावाट ऋषिगंगा पनबिजली परियोजना पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गयी है. जबकि एनटीपीसी की 480 मेगावाट तपोवन-विष्णुगाड परियोजना को भी काफी क्षति पहुंची है.
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केंद्रीय ऊर्जा मंत्री आरके सिंह ने कहा कि नुकसान के कारणों का पता लगाने के लिए इसरो की तस्वीरों के आधार पर एनटीपीसी, टीएचडीसी और एसजेवीएनएल के पदाधिकारियों की एक टीम मौके का निरीक्षण करेगी. इसके अलावा सिंह ने कहा कि पर्वतीय राज्यों में सतर्कता प्रणाली उपलब्ध कराई जाएगाी ताकि हिमस्खलन आदि घटनाओं की पूर्व में जानकारी मिल सके. साथ ही सिंह ने कहा कि इस वक्त हमारे लिए सबसे बड़ी चुनौती सुरंग में फंसे करीब 34 लोगों को बचाना है. अभी हम सुरंग के अंदर 70 मीटर तक गए हैं और करीब 180 मीटर तक और जाना है. किस तरह से हम सुरंग से मलवा निकाले इसके लिए पदाधिकारियों के साथ बातचीत की गई है.
तपोवन-विष्णुगाड परियोजना को लगभग 1500 करोड़ रुपये का नुकसान केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मृतक आश्रितों को राज्य सरकार एवं केंद्र सरकार आर्थिक सहायता उपलब्ध कराएगी. जबकि एनटीपीसी को भी मृतकों के परिजनों को 20-20 लाख रुपये देने को कहा गया है, ताकि उनके परिवार आपदा से उबर सकें. इससे पहले तपोवन में परियोजनाओं का निरीक्षण करने के बाद सिंह ने कहा कि आपदा से तपोवन-विष्णुगाड परियोजना को लगभग 1500 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. उन्होंने कहा कि पहले इस परियोजना के पूरे होने की समय सीमा वर्ष 2028 तय की गई थी, लेकिन अब यह कब होगा यह आकलन करने के बाद ही तय हो पायेगा.