आत्मनिर्भर भारत- चुनौतियां एवं संभावनाए विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का समापन

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बदायूं। गिन्दो देवी महिला महाविद्यालय के तत्वाधान में भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान द्वारा सम्पोषित आत्मनिर्भर भारत- चुनौतियां एवं संभावनाए विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का समापन हो गया।
सेमिनार के द्वितीय दिवस तकनीकी सत्र का शुभारंभ प्राचार्या व आयोजन सचिव प्रोफेसर डॉ० वंदना शर्मा के संरक्षण में व उप प्राचार्या डॉ गार्गी बुलबुल की अध्यक्षता में किया गया। जिसमें विभिन्न महाविद्यालयों के प्रोफेसरों एवं छात्र छात्राओं ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए। तकनीकी सत्र का सफल संचालन असिस्टेंट प्रोफेसर सरला देवी चक्रवर्ती कॉर्डिनेटर नैक व आंतरिक गुणवत्ता आश्वाशन प्रकोष्ठ ने किया कहा कि आत्मनिर्भर भारत के सपने संजोते हुए भारत का प्रत्येक सदस्य जब यह तय कर लेगा कि उसे आत्मनिर्भर बनना है तो इस सपने को साकार होने में देर नहीं लगेगी क्योंकि आत्म निर्भर भारत का निर्माण आत्मनिर्भर लोगों के द्वारा ही संभव है।

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द्वितीय सत्र में समापन समारोह की मुख्य अतिथि व मुख्य वक्ता प्रोफेसर अर्चना गिरी हेड ऑफ डिपार्टमेंट संस्कृत बरेली कॉलेज बरेली, कार्यक्रम अध्यक्ष प्रोफेसर डॉक्टर मनवीर सिंह बी एड डिपार्टमेंट एस एन एम दास कॉलेज बदायूं, संयोजक प्रोफेसर डॉ० मनमीत कौर , सह संयोजक प्रोफ़ेसर डॉ नीलम गुप्ता, आयोजन सचिव प्रोफेसर डॉक्टर वंदना शर्मा, विशाल रस्तोगी अध्यक्ष प्रबंध समिति, गौरव रस्तोगी सचिव प्रबंध समिति आदि ने संयुक्त रूप से मां शारदे के समक्ष दीप प्रज्वलित कर माल्यार्पण कर किया। प्रोफेसर अर्चना गिरि ने बताया कि आत्मनिर्भर भारत के लिए स्वदेशी का मंत्र जरूरी है। महात्मा गांधी का अंतिम व्यक्ति की देखभाल करने का सपना, अंतिम व्यक्ति को सक्षम बनाने की उनकी आकांक्षा तभी पूर्ण होगी जब हर हाथ में रोजगार होगा। कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता है।काम काम होता है। यह आत्मनिर्भरता का भाव हमें अपने घर से ही जागृत करना होगा। अपने यहाँ के उत्पादों की खरीद को बढ़ाना देना होगा उनकी क्वालिटी को बेहतर करना होगा ताकि विदेशी भी उन उत्पादों को खरीद सके तभी होगा आत्मनिर्भर भारत का सपना सच। प्रोफेसर डॉ मनवीर सिंह ने बताया कि शिक्षा ही किसी भी देश समाज व राज्य के विकास का आधारभूत माध्यम होती है। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति आत्मनिर्भर भारत के स्वर्णिम भविष्य की संकल्पना है। अतीत के अनुभवों से सीख लेकर वर्तमान की चुनौतियों को समझकर तथा भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर इसको तैयार किया गया है।

प्रोफेसर वंदना शर्मा एवं प्रबंधक गौरव रस्तोगी ने सभी अतिथियों का स्वागत बैज लगाकर शॉल व प्रतीक चिन्ह देखकर देकर किया। अंत में प्रोफेसर वंदना शर्मा ने सभी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए बताया कि इस सेमिनार के माध्यम से आत्मनिर्भर भारत को प्राप्त करने हेतु प्रगति का सही आंकलन करने का प्रयास किया गया ताकि भविष्य की तस्वीर बदलने हेतु भावी पथ प्रशस्त हो सके। समापन सत्र का संचालन डॉ शुभी भाषीन ने किया। आभार ज्ञापन प्रोफ़ेसर वंदना शर्मा ने किया। इस अवसर पर प्रोफेसर नीरजा अस्थाना,डॉ यशार्थ गौतम, पीयूष,डॉ अनुराग यादव, आशीष कुमार, कनुप्रिया, किरण, स्वेता, खुशबू, आदि उपस्थित रहे। असिस्टेंट प्रोफेसर सरला देवी चक्रवर्ती,डॉ इन्दु, डॉ श्रद्धा, डॉ शिखा, डॉ निशी, डॉ वंदना, डॉ शालू, डॉ शिल्पी सहित महाविद्यालय परिवार के सभी सदस्यों की सक्रिय सहभागिता एवं सहयोग रहा।

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