नाले के पानी से पता चलेगा सामुदायिक संक्रमण और अवैध दवाओं का इस्तेमाल
अमेरिका में भारतीय वैज्ञानिक डॉ. नरेंद्र वर्मा ने खोजी एक नई तकनीक:
नैनीताल। डॉ नरेंद्र वर्मा अमेरिका के बोस्टन कॉलेज में रिसर्च साइंटिस्ट के पद पर काम कर रहे हैं। इससे पहले आईआईटी कानपुर से पीएच.डी. की डिग्री हासिल की उसके बाद कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी में काम किया। अपनी तकनीक के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि भविष्य में इस चिप के द्वारा सोसाइटी में अवैध ड्रग्स के इस्तेमाल और संक्रमण का आसानी से पता चल जाएगा। इसमे नाले के पानी को चिप के ऊपर डालना होगा और जिस्का परिणाम कुछ मिनट बाद मोबाइल फोन की तरह डिवाइस में दिख जाएगा। इस काम को अमेरिका के एक प्रतिष्ठित जर्नल ए.सी.एस. नैनो ने पब्लिश किया है और इसके पेटेंट का आवेदन भी किया जा चुका है।


इस तकनीक को मार्केट में लॉन्च करने के लिए डॉ. नरेंद्र वर्मा को एक अमेरिकी कंपनी ने सीनियर प्रोसेस डेवलपमेंट साइंटिस्ट की जॉब ऑफर की है जहां उन्हें 1 करोड़ से ऊपर का सालाना पैकेज और कंपनी के 50 हजार शेयर मिलेंगे। आगे चलकर तकनीक को अपने देश में लाने की योजना है।


डॉ वर्मा चाहते हैं की हमारे जिले के बच्चे विज्ञान और प्रौद्योगिकी में कुछ नया करने के लिए प्रेरित हो। दुनिया में सारे विकसित देश तकनीक से ही आगे बढ़े हैं। नौकरी से लोग केवल खुद का जीवन अच्छा कर सकते हैं लेकिन समाज के लिए संसाधन और नौकरियां पैदा करना तकनीक से ही संभव है। डॉ वर्मा एक निम्न मध्यम वर्गीय परिवार से संबंधित हैं। उनकी बेसिक शिक्षा ग्राम जादोंपुर पट्टी के प्राइमरी स्कूल से हुई और बी.एससी. तक की पढाई बीसलपुर से। एमएससी फिजिक्स करने के बाद नेट और गेट क्वालिफाई किया फिर गवर्नमेंट की फेलोशिप से एम.टेक और पीएचडी हासिल की। अपनी उपलब्धि का श्रेय वो अपने पिता श्री राजेंद्र प्रसाद को देते हैं जो एक किसान हैं। अपने पेशे के साथ-साथ वो अपने गांव के विकास के लिए भी योगदान देते रहते हैं। उनकी पत्नी श्रीमती उर्मिला देवी जो पहले अमेरिका में उनके साथ थीं वर्तमान में ग्राम प्रधान हैं।
डॉ यासीन खान
ब्यूरो चीफ नैनीताल













































































