राष्ट्रीय लोक अदालत में 56,425 वादों का निस्तारण, 5.40 करोड़ रुपये की धनराशि वसूल की
बदायूं। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली एवं उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के निर्देश पर शनिवार को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में जनपद न्यायालय परिसर में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। प्रभारी जनपद न्यायाधीश एवं अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सुश्री रिन्कू ने मां सरस्वती की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर एवं दीप प्रज्ज्वलित कर लोक अदालत का शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत को पूरे देश में न्याय पर्व और जनकल्याणकारी दिवस के रूप में आयोजित किया जाना चाहिए। उन्होंने अधिक से अधिक मामलों के निस्तारण के लिए न्यायिक अधिकारियों एवं बैंक अधिकारियों को बधाई दी।सुश्री रिन्कू ने कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत ऐसा मंच है, जहां पक्षकार आपसी समझौते के आधार पर सस्ता, सुलभ एवं त्वरित न्याय प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने बैंक अधिकारियों एवं प्रतिनिधियों से भी आमजन से जुड़े बैंक विवादों को आपसी सहमति के आधार पर निस्तारित कराने में सहयोग की अपील की।जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के प्रभारी सचिव एवं अपर सिविल जज (सीनियर डिवीजन)/त्वरित न्यायाधीश श्री अंकित रस्तोगी ने बताया कि लोक अदालत के माध्यम से आपराधिक शमनीय वाद, एनआई एक्ट की धारा 138, मोटर दुर्घटना प्रतिकर, वैवाहिक एवं पारिवारिक विवाद, श्रम संबंधी मामले, भूमि अधिग्रहण, किरायेदारी, यातायात चालान, राजस्व तथा विद्युत बिल आदि मामलों का निस्तारण कराया जा सकता है।लोक अदालत में प्रधान न्यायाधीश एवं अपर प्रधान न्यायाधीश, कुटुंब न्यायालय द्वारा आपसी समझौते के आधार पर 102 पारिवारिक विवादों का निस्तारण किया गया। मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण में 86 प्रतिकर याचिकाओं का निस्तारण कर पीड़ितों को 5,20,81,800 रुपये की क्षतिपूर्ति दिलाई गई। उपभोक्ता फोरम में पांच में से चार वादों का निस्तारण करते हुए 19,46,496 रुपये की क्षतिपूर्ति दिलाई गई। स्थायी लोक अदालत में 20 में से दो वादों का निस्तारण हुआ।मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा करीब 1,954 मामलों का निस्तारण किया गया। प्री-लिटिगेशन से जुड़े भारत संचार निगम लिमिटेड, विद्युत विभाग, राजस्व, स्थानीय निकाय, विभिन्न बैंकों एवं अन्य मामलों सहित करीब 46,617 मामलों का निस्तारण हुआ। वहीं न्यायालयों में लंबित फौजदारी एवं सिविल वादों में करीब 7,854 मामलों का निस्तारण किया गया।इस प्रकार राष्ट्रीय लोक अदालत में कुल 56,425 वादों का निस्तारण हुआ तथा करीब 5,40,35,895 रुपये की धनराशि वसूल की गई। लोक अदालत को सफल बनाने में न्यायिक अधिकारियों, कर्मचारियों, पराविधिक स्वयंसेवकों तथा विभिन्न बैंकों के अधिकारियों एवं प्रतिनिधियों का महत्वपूर्ण सहयोग रहा।
















































































