रक्षाबंधन पर भी खाली रही आउटसोर्स कर्मियों की जेब
बरेली। बरेली मण्डल के राजकीय एवं अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत आउटसोर्स कर्मियों को हर माह की तरह जुलाई माह का मानदेय रक्षाबंधन जैसे महत्वपूर्ण एवं पारिवारिक भावनाओं से जुड़े त्योहार पर भी समय से नहीं मिल सका। मानदेय का भुगतान न होने से आर्थिक रूप से सीमित आय पर निर्भर इन कर्मचारियों में गहरी निराशा, पीड़ा और असंतोष देखने को मिल रहा है। इस गंभीर समस्या पर शिक्षणेत्तर कर्मचारी संयुक्त परिषद के वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष हरी शंकर ने कड़ी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आउटसोर्स कर्मी विद्यालयों की व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। वह प्रतिदिन अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन पूरी निष्ठा, ईमानदारी और मेहनत के साथ करते हैं। इसके बावजूद जब उनके श्रम का पारिश्रमिक समय पर नहीं मिलता, तो यह स्थिति कर्मचारियों के लिए अत्यंत पीड़ादायक हो जाती है। हरी शंकर ने कहा कि रक्षाबंधन जैसे पवित्र त्योहार पर भी मानदेय के लिए कर्मचारियों को इंतजार करना पड़ना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। मानदेय न मिलने के कारण निराशा का सामना करना पड़ा है।
उन्होंने कहा कि आउटसोर्स कर्मियों का मासिक मानदेय कोई अतिरिक्त सुविधा नहीं, बल्कि उनके द्वारा किए गए श्रम का निर्धारित पारिश्रमिक है। हरी शंकर ने कहा कि कर्मचारी से समय पर सेवा की अपेक्षा की जाती है, तो उसके श्रम का पारिश्रमिक भी समय पर मिलना चाहिए। त्योहार के अवसर पर मानदेय रोकना या भुगतान में देरी करना सीधे तौर पर उसके परिवार की खुशियों और घरेलू बजट को प्रभावित करता है। उन्होंने कहा कि सीमित मानदेय में अपने परिवार का भरण-पोषण करने वाले आउटसोर्स कर्मियों के लिए समय पर मिलने वाला वेतन अत्यंत महत्वपूर्ण है। महीने भर की मेहनत के बाद यदि मानदेय निर्धारित समय पर उपलब्ध नहीं होता, तो राशन, बच्चों की पढ़ाई, दवाइयों, आवागमन और अन्य जरूरी खर्चों को पूरा करना कठिन हो जाता है। हरी शंकर ने विभागीय अधिकारियों से जुलाई माह के लंबित मानदेय का तत्काल भुगतान कराने की मांग की है। साथ ही उन्होंने भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो, इसके लिए प्रत्येक माह आउटसोर्स कर्मियों को समय से मानदेय उपलब्ध कराने की प्रभावी एवं स्थायी व्यवस्था किए जाने की मांग की। उन्होंने कहा कि आउटसोर्स कर्मी विद्यालयों में भले ही अलग व्यवस्था के माध्यम से कार्यरत हों, लेकिन वे भी विभागीय व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और उनके श्रम एवं सम्मान की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए। समय पर मानदेय केवल आर्थिक भुगतान नहीं, बल्कि मेहनतकश कर्मचारी के श्रम और सम्मान का अधिकार है। हरी शंकर ने आशा व्यक्त की कि संबंधित विभागीय अधिकारी इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए मानवीय दृष्टिकोण अपनाएंगे और जुलाई माह के लंबित मानदेय का भुगतान शीघ्र कराकर आउटसोर्स कर्मियों एवं उनके परिवारों को आर्थिक राहत प्रदान करेंगे। त्योहार की खुशियां हर परिवार का अधिकार हैं मेहनत करने वाले आउटसोर्स कर्मियों को उनके हक का मानदेय समय पर मिलना ही चाहिए।
















































































