बदायूं। श्री सीताराम मंदिर में चल रही श्री रामकथा के अंतिम दिन कथा व्यास आचार्य मुमुक्ष कृष्ण महाराज ने किष्किंधा कांड से लेकर उत्तर कांड तक की कथा का विस्तार से वर्णन किया। कथा विश्राम से पूर्व उन्होंने किष्किंधा कांड के माध्यम से सच्ची एवं निस्वार्थ मित्रता की महत्ता बताई।सुंदरकांड के प्रसंग का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि सिंहिका का अर्थ ईर्ष्या है। ईर्ष्या की प्रवृत्ति प्रायः अपने से ऊपर उठने वालों पर कुठाराघात करती है, जबकि अपने से नीचे अथवा बराबर वालों के प्रति उसका वैसा व्यवहार नहीं होता। लंकाकांड की कथा के माध्यम से उन्होंने युद्ध की मर्यादाओं का वर्णन किया। वहीं उत्तरकांड पर प्रकाश डालते हुए कलियुग की महिमा का विस्तार से वर्णन किया।कथा के समापन अवसर पर श्रद्धालुओं ने श्रद्धा एवं सच्चे मन से व्यास पूजा की। मुख्य यजमानों द्वारा राम यज्ञ कराया गया। इसके बाद ब्रह्मभोज हुआ और सभी भक्तों ने भंडारे का प्रसाद ग्रहण किया। आयोजन की व्यवस्थाओं में मुख्य यजमान अर्जुन लाला गुप्ता, हरिओम रस्तोगी, पंडित बालमुकुंद महेरे तथा पुरोहित प्रदीप महेरे का विशेष सहयोग रहा। इस दौरान कवि महेश मित्र, कामेश पाठक, विप्र नेता राजेश शर्मा, डॉ. उमा सिंह गौर, दुलारी खुराना, मारुत सक्सेना, अजय मिश्र, सुनील सपड़ा, नामित सदस्य केएल गुप्ता, आचार्य गुरुचरण मिश्र सहित सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।