बरेली। शिक्षणेत्तर कर्मचारी संयुक्त परिषद बरेली के जिलाध्यक्ष हरी शंकर ने राज्य सरकार से मांग की है कि राज्य कर्मचारियों की भांति अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत कर्मचारियों को भी तीन सौ दिनों के अर्जित अवकाश का नकदीकरण प्रदान किया जाए। जिलाध्यक्ष हरी शंकर ने कहा कि अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षणेत्तर कर्मचारी वर्षों तक पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ अपनी सेवाएं देते हैं। वे विद्यालयों के प्रशासनिक कार्यों, अभिलेखों के संधारण, विद्यार्थियों की सुविधाओं एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं को सुचारु रूप से संचालित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसके बावजूद उन्हें राज्य कर्मचारियों के समान सुविधाओं से वंचित रखा जाना दुर्भाग्यपूर्ण है।उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अपने नियमित कर्मचारियों को सेवा निवृत्ति के समय 300 दिनों तक के अर्जित अवकाश का नकदीकरण प्रदान करती है, जिससे उन्हें आर्थिक सुरक्षा मिलती है। लेकिन अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के कर्मचारियों को इस सुविधा से वंचित रखा गया है, जो कि समान कार्य के बावजूद असमानता को दर्शाता है। हरी शंकर ने स्पष्ट रूप से कहा कि “समान कार्य के लिए समान अधिकार और सुविधाएं” का सिद्धांत सभी कर्मचारियों पर समान रूप से लागू होना चाहिए। यदि राज्य कर्मचारी 300 दिनों तक अर्जित अवकाश नकदीकरण का लाभ प्राप्त कर सकते हैं, तो सहायता प्राप्त विद्यालयों के कर्मचारियों को भी यह सुविधा मिलनी चाहिए। उन्होंने प्रदेश सरकार से मांग करते हुए कहा कि इस विषय पर संवेदनशीलता के साथ विचार कर जल्द से जल्द निर्णय लिया जाए, ताकि हजारों शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को उनका अधिकार मिल सके और उनके जीवन में आर्थिक स्थिरता आ सके।अंत में जिलाध्यक्ष हरी शंकर ने आशा जताई कि सरकार कर्मचारियों के हित में सकारात्मक कदम उठाएगी और जल्द ही इस मांग को पूरा करेगी।