बदायूँ में एचपीसीएल डबल मर्डर केस में बड़ा एक्शन, मुख्य आरोपी अजय प्रताप सिंह पर NSA की कार्रवाई
बदायूँ। जिले के चर्चित एचपीसीएल (HPCL) डबल मर्डर केस में शासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी अजय प्रताप पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) लागू कर दिया है। इस फैसले को कानून-व्यवस्था के प्रति सरकार की सख्ती के रूप में देखा जा रहा है। 12 मार्च 2026 को हुए इस जघन्य हत्याकांड ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था, जिसके बाद से लगातार कार्रवाई का सिलसिला जारी है।
गौरतलब है कि 12 मार्च को एचपीसीएल प्लांट परिसर के अंदर ही मुख्य प्रबंधक सुधीर गुप्ता और उप प्रबंधक हर्षित मिश्रा की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। घटना उस समय हुई जब दोनों अधिकारी अपने नियमित कार्य में व्यस्त थे। प्लांट के अंदर सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद इस तरह की वारदात ने कई सवाल खड़े कर दिए थे। घटना के बाद इलाके में दहशत फैल गई और प्रशासनिक व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठे।
मामले की गंभीरता को देखते हुए शासन ने तत्काल प्रभाव से स्थानीय पुलिस प्रशासन पर कार्रवाई की। थाना मूसाझाग के थानाध्यक्ष और संबंधित चौकी इंचार्ज को निलंबित कर दिया गया। वहीं, क्षेत्राधिकारी (CO) उझानी, एसपी सिटी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) का तबादला कर दिया गया। इस कदम को प्रशासनिक जवाबदेही तय करने की दिशा में बड़ा कदम माना गया।
इसके साथ ही शासन ने मामले की निष्पक्ष और गहन जांच के लिए उच्चस्तरीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया। इस SIT में बरेली मंडल के कमिश्नर, डीआईजी बरेली सहित खाद एवं रसद विभाग के प्रमुख सचिव को शामिल किया गया। SIT ने घटना के विभिन्न पहलुओं की बारीकी से जांच की और अपनी रिपोर्ट शासन को सौंप दी है। रिपोर्ट में कई अहम खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
अब मुख्य आरोपी अजय प्रताप पर NSA लगाए जाने के बाद प्रशासन और अधिक सख्त नजर आ रहा है। NSA के तहत आरोपी को लंबे समय तक बिना जमानत के हिरासत में रखा जा सकता है, जिससे यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि शासन इस मामले में किसी भी तरह की ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है।
इस पूरे घटनाक्रम ने औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा व्यवस्था पर भी बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। खासकर सरकारी उपक्रमों में कार्यरत अधिकारियों की सुरक्षा को लेकर नए सिरे से मंथन शुरू हो गया है। स्थानीय लोगों और कर्मचारियों में भी इस घटना के बाद भय और असुरक्षा का माहौल देखने को मिला।
फिलहाल, शासन द्वारा की जा रही सख्त कार्रवाई से यह संदेश देने की कोशिश की जा रही है कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। अब सभी की नजरें आगे की कार्रवाई और न्यायिक प्रक्रिया पर टिकी हैं, जिससे पीड़ित परिवारों को न्याय मिल सके।















































































