बरेली। राजेंद्र नगर स्थित नीलकंठ मंदिर में चल रही श्री शिव महापुराण कथा के चतुर्थ दिवस पर शुक्रवार को भक्ति, आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिला। इस अवसर पर “सती चरित्र” का मार्मिक और भावपूर्ण वर्णन किया गया, जिसने उपस्थित श्रद्धालुओं को आत्मचिंतन के लिए प्रेरित किया। कथावाचक ने माता सती के जीवन प्रसंगों को विस्तार से प्रस्तुत करते हुए उनके भगवान शिव के प्रति अटूट प्रेम, समर्पण और स्वाभिमान को रेखांकित किया। दक्ष प्रजापति के यज्ञ प्रसंग का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि जहां अपमान हो, वहां आत्मसम्मान की रक्षा सर्वोपरि होती है। माता सती का त्याग और तपस्या जीवन में आदर्श मूल्यों को अपनाने की प्रेरणा देता है। कथा में यह भी बताया गया कि भगवान शिव और माता सती का संबंध केवल दांपत्य नहीं, बल्कि आत्मा और परमात्मा के दिव्य मिलन का प्रतीक है। सती चरित्र के माध्यम से श्रद्धालुओं को भक्ति में दृढ़ता, रिश्तों में मर्यादा और सत्य के मार्ग पर चलने का संदेश दिया गया। कार्यक्रम में मुख्य यजमान के रूप में पी. के. जग्गी ने विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना कर कथा का पुण्य लाभ प्राप्त किया। मंदिर समिति के संरक्षक सतीश कातिब “मम्मा”, मीडिया प्रभारी आयुष अग्रवाल, अध्यक्ष पवन अरोड़ा सहित कई पदाधिकारी एवं गणमान्य लोग आयोजन में उपस्थित रहे और व्यवस्थाओं में सक्रिय सहयोग किया। मंदिर परिसर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती रही। शिव भजनों, रुद्र मंत्रों और हर-हर महादेव के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। कथा के समापन पर आरती एवं प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ। आयोजित शिव महापुराण कथा क्षेत्र में धार्मिक जागरूकता और आध्यात्मिक उन्नयन का प्रभावी माध्यम बन रही है। आगामी दिनों में भी विभिन्न प्रसंगों के माध्यम से श्रद्धालुओं को धर्म, नीति और जीवन मूल्यों का संदेश दिया जाएगा।