बरेली। हज इस्लाम की सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक यात्रा है। यह हर साल ज़िल हिज्जा के महीने में मक्का के अराफात में होता है और पांच दिनों तक चलता है। यह यात्रा मुसलमानों के लिए आस्था, सब्र और आध्यात्मिक शुद्धि का प्रतीक है। इस्लाम धर्म में हज सबसे पवित्र यात्रा हैं। हर साल दुनियाभर से लाखों मुसलमान सऊदी अरब के मक्का शहर में हज करने पहुंचते हैं।हज इस्लाम के पांच पिलर्स में से एक है और हर साहिबे निसाब मुसलमान के लिए अपनी जिंदगी में कम से कम एक बार इस फ़र्ज़ को अदा करना जरूरी माना गया है। अगर वह आर्थिक और शारीरिक रूप से सक्षम हो। इस यात्रा के दौरान कई खास अरकान अदा किये जाते है।जो मुसलमानों को धार्मिक रूप से मजबूत बनाने और अल्लाह के करीब आने का मौका देती हैं। कब होती है हज यात्रा? हज हर साल इस्लामी कैलेंडर के बारहवें महीने ज़िल हिज्जा में होता है। यह आमतौर पर हिज्जा की 8 तारीख से 12 तारीख तक चलता है। इस्लामी कैलेंडर चांद के हिसाब से चलता है इसलिए ग्रेगोरियन कैलेंडर के मुताबिक हज की तारीख हर साल करीब 11-12 दिन पहले आ जाती है।इस साल 2026 में हज 25 मई से 30 मई के बीच हो सकती है,चाँद की तारीख 9 ज़िल हिज्जा को अराफ़ात के मैदान पर हज फ़र्ज़ अदा होगा। कैलेंडर के मुताबिक 27 मई को हज होना है जो चांद दिखने पर तय होगा। बरेली हज सेवा समिति के पम्मी ख़ाँ वारसी ने बताया कि हज यात्रियों को बरेली हज सेवा समिति द्वारा ट्रेनिंग दे दी गई है। ज़रूरी बातों और बारीकियों को बताया गया है। सभी आज़मीन ए हज ने अपनी तीसरी किश्त भी जमा कर दी है। हाजियो ने अपने अपने घरों पर जाने से पहले मिलन दावतों के लिये तैयारियां और तारीख तय करने में लगे हुए हैं और लोगों से मिलनकर अपने गिलेशिकबे दूर कर रहे है।हजयात्रियों के अज़ीज़दारो ने भी सफर की मुबारकबाद और दुआ देना शुरू कर दी है।हजयात्रियों की तैयारियां मुकम्मल दौर पर है।बरेली से इस बार 695 आज़मीन हजयात्रा पर रवाना होंगे।