बरेली / बदायूं । कस्बा ककराला में सूफी संत हज़रत शाह शुजाअत अली मियाँ रहमतुल्लाह अलैह का 70वाँ सालाना उर्स अकीदत और एहतराम के साथ शुरू हो गया। उर्स के पहले दिन पारंपरिक जुलूस-ए-परचम कुशाई के साथ शानदार आगाज़ हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने शिरकत कर दरगाह शरीफ की फिजाओं को रूहानियत से भर दिया।सुबह उर्स की शुरुआत कुरआन ख्वानी से हुई, जिसमें उलमा-ए-किराम और हाफिज-ए-कुरआन ने तिलावत कर मुल्क में अमन और खुशहाली की दुआएं मांगीं। दूर-दराज इलाकों से आए जायरीन का सुबह से ही तांता लगा रहा और दिनभर दरगाह पर चादरपोशी का सिलसिला जारी रहा।दोपहर जुहर की नमाज के बाद सज्जादानशीन हज़रत शाह मोहम्मद गाजी मियाँ की सरपरस्ती में जुलूस-ए-परचम कुशाई निकाला गया। जुलूस जामा मस्जिद, हुसैन गली, खिलाड़ी वाली चौपाल, पूरब पुल और मुख्य बाजार से होकर गुजरा। रास्ते भर अकीदतमंदों ने फूल बरसाकर स्वागत किया और सबीलों के जरिए जलपान की व्यवस्था की गई।दरगाह पहुंचने पर परचम नस्ब किया गया, जिसके बाद जायरीन ने मजार पर हाजिरी देकर चादरपोशी की और देश में अमन-चैन की दुआ की। उर्स में देश के विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में मुरीदीन और जायरीन पहुंचे, जिससे पूरा क्षेत्र श्रद्धालुओं की भीड़ से गुलजार रहा।उर्स के दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। प्रशासन और उर्स इंतजामिया कमेटी ने साफ-सफाई, पेयजल, रोशनी और लंगर की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित की है। शाह सकलैन एकेडमी के वालेंटियर्स ने भीड़ प्रबंधन और जायरीन की मदद में अहम भूमिका निभाई।पहले दिन का समापन दुआओं के साथ हुआ, जबकि आगामी दिनों में भी विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।