बरेली में गरजे इमरान मसूद: बोले- भाजपा को सिर्फ कांग्रेस ही हरा सकती,नीट पेपर लीक को लेकर केंद्र पर साधा निशाना
बरेली। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की बिसात अभी से बिछनी शुरू हो गई है। इसी क्रम में कांग्रेस के कद्दावर नेता और सांसद इमरान मसूद बुधवार को बरेली पहुंचे, जहां उन्होंने नवाब मुजाहिद की कोठी पर आयोजित एक सभा को संबोधित किया और पत्रकारों से रूबरू होते हुए केंद्र व राज्य सरकार पर जमकर प्रहार किए। इमरान मसूद ने नीट (NEET) परीक्षा में हुई धांधली, पेपर लीक, बुलडोजर कार्रवाई और सांप्रदायिक राजनीति जैसे गंभीर मुद्दों पर अपनी बेबाक राय रखी। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि देश में नफरत की राजनीति को खत्म करने और भाजपा को सत्ता से बाहर करने के लिए कांग्रेस का झंडा थामना जरूरी है, क्योंकि बिना कांग्रेस के भाजपा को हराना नामुमकिन है।बरेली पहुंचे वरिष्ठ कांग्रेस नेता इमरान मसूद ने संगठन सृजन अभियान के तहत कार्यकर्ताओं में जोश भरा। उन्होंने वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज देश में नफरत की आग फैलाई जा रही है और बुनियादी मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाया जा रहा है। नीट परीक्षा का उदाहरण देते हुए मसूद ने कहा कि यह सरकार ‘लीक सरकार’ बन चुकी है, जहां हर भर्ती और परीक्षा का पर्चा लीक हो जाता है। उन्होंने पूर्व की सीबीआई जांचों पर सवाल उठाते हुए कहा कि सीबीआई केवल सरकार के ‘तोते’ की तरह काम कर रही है और असली दोषियों पर कार्रवाई करने के बजाय उन्हें संरक्षण दिया जा रहा है। मसूद ने तंज कसते हुए कहा कि गरीब बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर यह सरकार देश को किस दिशा में ले जा रही है, यह सोचने का विषय है।इमरान मसूद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जनता से ‘तेल और सोना न खरीदने’ की अपील पर भी तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लाल बहादुर शास्त्री और इंदिरा गांधी के त्याग का उदाहरण देते हुए कहा कि उन नेताओं ने पहले स्वयं त्याग किया था, जबकि वर्तमान सरकार जनता से त्याग मांग रही है और खुद विलासिता के आयोजनों में लाखों लीटर तेल खर्च कर रही है। उन्होंने विदेश नीति पर भी सरकार को घेरा और कहा कि ईरान जैसे पुराने और भरोसेमंद दोस्तों से मुंह फेरकर सरकार ने देश को रणनीतिक रूप से कमजोर कर दिया है। उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था और बुलडोजर कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए मसूद ने आरोप लगाया कि एनकाउंटर और बुलडोजर केवल जाति और धर्म देखकर चलाए जा रहे हैं, जो कि लोकतंत्र और संविधान के खिलाफ है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे राहुल गांधी की गांधीवादी और अंबेडकरवादी विचारधारा को मजबूत करें ताकि 2027 में एक न्यायप्रिय सरकार का गठन हो सके।















































































