संकट की घड़ी में पंजाबी महासभा ने थामा पीड़ित परिवार का हाथ, 2 लाख की मदद और बच्चियों की शिक्षा का लिया संकल्प
बरेली। “नर सेवा ही नारायण सेवा है” इस ध्येय वाक्य को चरितार्थ करते हुए पंजाबी महासभा, बरेली एवं उनके सहयोगियों ने समाज के प्रति अपनी अटूट जिम्मेदारी और एकजुटता की एक अनूठी मिसाल पेश की है। हाल ही में समाज के एक सक्रिय परिवार के मुखिया के असमय और अल्पायु में निधन से उपजे संकट के बीच, पंजाबी महासभा एक ढाल बनकर खड़ी हुई और पीड़ित परिवार के अंधेरे जीवन में उम्मीद की नई किरण जगाई।
मंगलवार को श्री बांके बिहारी मंदिर के पावन प्रांगण में आयोजित एक अत्यंत भावुक कार्यक्रम के दौरान, दिवंगत सदस्य की पत्नी और उनकी दो मासूम बच्चियों को 2 लाख की आर्थिक सहायता राशि भेंट की गई। परिवार की मुखिया की पत्नी स्वयं पंजाबी महासभा की सदस्य हैं, और उनकी इस कठिन परिस्थिति को देखते हुए समस्त सदस्यों ने स्वेच्छा से यह सहयोग राशि एकत्रित की।
महासभा का सहयोग केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं रहा। बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने के उद्देश्य से संस्था ने दोनों छोटी बच्चियों की संपूर्ण शिक्षा का खर्च उठाने की भी घोषणा की है। इसके साथ ही, पीड़ित महिला को सम्मानजनक जीवन प्रदान करने के लिए उनके रोजगार (नौकरी) हेतु भी प्रभावी प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि वह आत्मनिर्भर होकर अपने परिवार का पालन-पोषण कर सकें।
यह सहायता पंजाबी महासभा के उन अनगिनत सेवा कार्यों की कड़ी है जो वर्षों से निरंतर जारी है जैसे विधवा पेंशन योजना: पिछले 12 वर्षों से असहाय महिलाओं के लिए यह योजना सफलतापूर्वक चलाई जा रही है।
बेटियों का कन्यादान: अब तक लगभग 92 निर्धन कन्याओं के विवाह में महासभा ने बढ़-चढ़कर आर्थिक एवं सामाजिक सहयोग किया है।
संकट में साथ: कुछ समय पूर्व ही कपूर परिवार के साथ हुई दुखद घटना (मर्डर) के बाद, महासभा ने उन्हें ₹5 लाख की तत्काल सहायता प्रदान की थी। इन सेवादारों का रहा विशेष सहयोग इस पुनीत कार्य को सफल बनाने में संजय आनंद, देवराज चंडोक, गुलशन आनंद, अमित अरोड़ा,यतिन भाटिया मनजीत सिंह बिट्टू प्रिंस सोढ़ी जगदीप अरोड़ा राम अरोड़ा मंटू सूरी नेहा साहनी, सिम्मी आनंद, संजीव सोही, संजीव गुलाटी, नीतू सेठी, आरती पूरी हनी आनंद मन्नू बक्शी, चरणजीत भल्ला, जूही आनंद तिलक राज दुसेजा संजीव सोही रोमी सेठी ज्ञानी काला सिंह आदि ने अग्रणी भूमिका निभाई। सभी उपस्थित सदस्यों ने नम आंखों से बच्चों के उज्जवल भविष्य की मंगलकामना की।
”अपनों के जाने का गम तो हम कम नहीं कर सकते,
पर उनके पीछे छूटे मासूमों के आंसू हम पोंछ सकते हैं।”
अंत में महासभा के पदाधिकारियों ने संकल्प दोहराया कि समाज का कोई भी परिवार खुद को बेसहारा न समझे, पंजाबी महासभा सदैव उनके सुख-दुख में एक मजबूत स्तंभ की तरह खड़ी रहेगी। संचालन महानगर अध्यक्ष संजय आनंद ने किया।














































































