बरेली। डायनेमिक एजुकेशनल रिसर्च सोसाइटी द्वारा “वैश्विक सतत विकास हेतु भारतीय ज्ञान प्रणालियों के पुनर्जीवन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं बौद्धिक संपदा शासन” विषय पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन रविवार को रोटरी भवन में किया गया। सम्मेलन हाइब्रिड मोड (ऑनलाइन एवं ऑफलाइन) में आयोजित हुआ, जिसमें देशभर से शिक्षाविदों, शोधार्थियों और विशेषज्ञों ने सहभागिता की। मुख्य अतिथि प्रोफेसर सुबोध कुमार भटनागर ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन ला रहा है। भारतीय ज्ञान परंपरा को वैश्विक मंच पर स्थापित करने के लिए आधुनिक तकनीकों और बौद्धिक संपदा अधिकारों का संरक्षण आवश्यक है। विशिष्ट अतिथि प्रोफेसर रवि कांत ने भारतीय संस्कृति, योग, आयुर्वेद और प्राचीन शिक्षा प्रणाली की वैश्विक उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि AI के माध्यम से भारतीय ज्ञान परंपरा को नई पहचान मिल सकती है। प्रोफेसर मंजुला जैन ने महिला शिक्षा और बहु-विषयक अनुसंधान के महत्व पर जोर दिया, जबकि प्रोफेसर सत्यवीर चौधरी ने नई शिक्षा नीति और तकनीकी नवाचार की भूमिका पर विचार रखे। प्रोफेसर एस.के. त्रिपाठी ने बौद्धिक संपदा अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता बताई। प्रोफेसर वंदना सिंह ने शिक्षा में तकनीकी समावेशन और महिला सशक्तिकरण में AI की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। वहीं प्रोफेसर अशोक कुमार पुरोहित ने वैश्विक सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में भारतीय ज्ञान परंपरा की उपयोगिता पर जोर दिया। सम्मेलन में देशभर से लगभग 130 शोध पत्र प्राप्त हुए। कार्यक्रम का संचालन सुश्री याशिका गुप्ता ने किया, जबकि डॉ. संजय पाल ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। इस अवसर पर शंकर पाल (अधिवक्ता), ओमेंद्र पाल सिंह, प्रो. पूनम रानी, ज्योति, लक्ष्मण, प्रो. डॉ. योगेश गुप्ता और सोमवीर सहित अनेक शिक्षाविद एवं शोधार्थी उपस्थित रहे।