नई दिल्ली। भारत में अपनी पर्यावरण संरक्षण गतिविधियों से अलग पहचान बनाने वाली वूमेन शिप्रा पाठक ने जापान के टोक्यो शहर में आयोजित प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन IAFOR – एशियन कॉन्फ्रेंस ऑन एजुकेशन एंड इंटरनेशनल डेवलपमेंट में प्रतिभाग किया। 7 दिन चलने वाले इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में लगभग 70 देश के शिक्षाविद, शोधकर्ता, नीति निर्माता शामिल हुए हैं। इस प्रतिष्ठित कार्यक्रम में लिंगनान यूनिवर्सिटी आफ इंडोनेशिया,यूनिवर्सिटी ऑफ यूटा एशिया कैंपस समेत अमेरिका और यूरोप समेत पूरे विश्व के अग्रणी संस्थान शामिल होंगे। जापान के टोक्यो शहर में आयोजित एशिया कांफ्रेंस आफ एजुकेशन एंड इंटरनेशनल डेवलपमेंट सेमिनार में वाटर वूमेन शिप्रा पाठक को आधुनिक शिक्षा नीति और सामाजिक विकास से जुड़े अपने विचार साझा करने के लिए आमंत्रित किया गया है। आपको बताते चलें इससे पहले भी भारत में 13000 कि0 मी0 पदयात्रा कर जल,नदी एवं महिला सशक्तिकरण के लिए कार्य करने वाली वाटर वूमेन शिप्रा के लिए पिछले दिनों लंदन की संसद में भी अपने विचार रखने का अवसर मिला था। 26 मार्च टोक्यो में इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में वाटर वूमेन शिप्रा भारतीय महिला शक्ति का प्रतिनिधित्व करते हुए “शिक्षा का सामाजिक न्याय और विकास में योगदान” जैसे महत्वपूर्ण विषय पर अपने विचार प्रस्तुत करेंगी। अब उनकी संस्था पंचतत्व का कार्य जल संरक्षण के साथ साथ शिक्षा के क्षेत्र तक पहुँच चुका है, और वे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। यह साबित करता है कि जब भारत की महिलाएं वैश्विक मंच पर अपने विचार रखती हैं, तो देश की पहचान और भी मजबूत होती है।