बरेली। खन्नू मोहल्ले की मस्जिद दादा मियाँ में तरावीह की नमाज़ में 14वें रमज़ान को क़ुरआन मुकम्मल होने पर जशन मनाया गया। रमज़ान-उल-मुबारक के पवित्र महीने में मस्जिदों में तरावीह की नमाज़ के दौरान कुरआन-ए-पाक का मुकम्मल ख़त्म होना एक बहुत ही ख़ुशी और बरकत भरा मौक़ा होता है। मस्जिद में यह ख़ुशी का इज़हार देखने को मिला, जहां नमाज़ियों ने ख़ुशी-ख़ुशी कुरआन की तिलावत सुनी और दुआएं मांगीं। पूरे रमज़ान में रोज़ाना 20 रकअत तरावीह अदा की जाती हैं हर रोज़ कुरआन के पारे पढ़े गए, जिससे अंत में पूरी कुरआन शरीफ की तिलावत मुकम्मल हुई। मस्जिद में इबादत की रौनक बनी रही और नमाज़ियों ने अल्लाह से रहमत की दुआएं कीं। ये मौके मुसलमानों के लिए बहुत अहम होते हैं, क्योंकि तरावीह में कुरआन की ख़त्म के साथ “ख़त्म-ए-कुरआन” की दुआ में अल्लाह से मग़फिरत, रहमत और जन्नत की दुआ के साथ अमन चैन भाईचारे कामयाबी,तरक़्क़ी, खुशहाली की ख़ुसूसी दुआ मांगी।अल्लाह हम सबकी इबादतें क़बूल फरमाए और अगले रमज़ान तक हिफ़्ज़-ओ-सेहत में रखे। तरावीह में मस्जिद के इमाम मुफ़्ती आज़म मंजरी खैरपुरी ने कुरआन ए पाक तिलावत की।कमेटी की ओर से तोहफों से नवाज़ा गया। इस मौके मुफ़्ती सलीम नूरी,हाजी नौशाद अली खाँ, डॉ परवेज़ नूरी,डॉ वसी अनवर,पम्मी वारसी,हाजी शाहबाज़ खान,सय्यद अर्सलाम अली,ज़फ़र अनवर,फ़ाहद जीशान रुफी,जावेद हाजी अज़मी शकील सीटू,आमिर खान,वली सादिक,हाजी ज़मीर,अम्बर,तारिक,सोहेल अनवर,हाजी अज़हर बेग,समाजसेवी पम्मी ख़ाँ वारसी आदि सहित बड़ी सँख्या नमाज़ी रहे सभी का हार पहनाकर इस्तक़बाल किया गया।