पद्मश्री डॉ बी के जैन ने सबको कहा अलविदालोगों के जीवन में रोशनी देने वाला दीपक बुझाकल चिकित्सालय परिसर में होगा उनका अंतिम संस्कार

WhatsApp Image 2026-02-28 at 8.29.30 PM
WhatsAppImage2024-05-04at205835
previous arrow
next arrow

चित्रकूट, परम पूज्य संत रणछोड़ दास जी द्वारा स्थापित श्री सदगुरु सेवा संघ ट्रस्ट के ट्रस्टी एवं विश्व ख्याति प्राप्त श्री सदगुरु नेत्र चिकित्सालय के निदेशक पद्मश्री डॉ बुधेन कुमार जैन(बी के जैन ) ने 27 फरवरी 2026 दिन शुक्रवार को लगभग शाम 4 बजे चित्रकूट की पावन धरती पर अंतिम सांस लेते हुए सबको अलविदा कहकर अपने आपको प्रभु चरणों में समाहित कर लिया उनके परलोक गमन से समूचे चित्रकूट सहित समूचे देश में शोक की लहर है उनके अंतिम दर्शन के लिए उनके चाहने वालों का तांता लगा हुआ है, लोग कह रहे है कि एक युग पुरुष
एक युग और सेवा सम्पूर्ण का अंत हो गया दूसरों के जीवन को रोशन करने वाला दीपक बुझ गया, डॉ जैन पिछले दो तीन माह से एक गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे जिनका इलाज मुंबई के सर एचएन रिलायंस फाउंडेशन अस्पताल में चल रहा था,उनका निधन एक गंभीर बीमारी के चलते हुआ है।कल दिन रविवार को सुबह 10 बजे नेत्र चिकित्सालय परिसर में डॉ जैन का होगा अंतिम संस्कार
डॉ जैन एक ऐसी शख्सियत थे जिन्होंने नेत्र चिकित्सक के रूप अपनी सेवा और समर्पण के जरिए देश ही नहीं अपितु विदेशों में भी अपनी और सदगुरु नेत्र चिकित्सालय के नाम की एक अलग ही पहचान बनाई है। आपको बता दे कि डॉ जैन 1974 से सदगुरु नेत्र चिकित्सालय से जुड़े और लगभग 52 वर्षों तक गरीब और जरूरतमंद लोगों की आंखों की रोशनी लौटाने का काम किया लगभग 17 लाख लोगों को उन्होंने आंखों की रोशनी देने का काम किया है।1948 में जन्मे डॉ जैन की प्रारंभिक शिक्षा शासकीय विद्यालय व्यंकट क्रमांक सतना में हुई,इसके बाद 1968 से 1973 तक एस एस मेडिकल कॉलेज रीवा से हुई इसके बाद 1977 से 1979 तक पी जी की शिक्षा उन्होंने मुंबई से प्राप्त की थी डॉ जैन वर्तमान AIIms रायपुर के अध्यक्ष थे , डॉ जैन को इस तरह दुनिया से अलविदा कहना समूचे विंध्य सहित देश के लिए एक बड़ी क्षति है।आपको बता दें कि अंधत्व निवारण एवं नेत्र चिकित्सा के क्षेत्र में सेवा कार्य के लिए विगत पांच दशकों में वह पद्मश्री से लेकर कई राष्ट्रीय, अंतराष्ट्रीय एवं राजकीय पुरस्कार से सम्मानित हो चुके हैं।
वर्ष 1996 में उन्हें सर्वश्रेष्ठ सामुदायिक नेत्र चिकित्सा सेवा प्रदान करने के लिए ‘ढान्ढा पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया।
इसके बाद वर्ष 2003 में उन्हें ‘फिरदौसी अवार्ड’ मिला।
2004 में मुंबई में आयोजित आई एडवांस सम्मेलन में उन्हें सामुदायिक नेत्र चिकित्सा में उत्कृष्ट कार्य हेतु ‘लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड’ प्रदान किया गया।
वर्ष 2005 में लंदन स्थित इंटरनेशनल सेंटर फॉर आई हेल्थ के भारतीय पूर्व छात्रों द्वारा उन्हें ‘सर्वश्रेष्ठ सामुदायिक नेत्र चिकित्सा कार्य’ के लिए सम्मानित किया गया।
वर्ष 2007 में उन्हें ‘आर. के. सेठ मेमोरियल अवार्ड’
2008 में ‘ग्लोरी ऑफ इंडिया अवार्ड’ प्राप्त हुआ।
2010 में अखिल भारतीय नेत्र विज्ञान सम्मेलन (AIOS) में उन्हें ‘सामुदायिक सामाजिक पुरस्कार’ और ग्रामीण समुदाय में उत्कृष्ट नेत्र सेवा के लिए ‘के. आर. दत्ता पुरस्कार’ से नवाजा गया।
2013 उनके लिए सम्मान से भरा वर्ष रहा, जब उन्हें ‘समाज रत्न अवार्ड’, विजन 2020 द्वारा ‘श्री धर्मसी नेनसी ओमान अवार्ड’, ‘
डॉ. एम.सी. नाहटा – राष्ट्रीय नेत्र सुरक्षा पुरस्कार’
एशिया पैसिफिक एकेडमी ऑफ ऑप्थाल्मोलॉजी (APAO) द्वारा ‘अंधत्व निवारण में उत्कृष्ट कार्य हेतु पुरस्कार’ प्रदान किए गए।
2014 में उन्हें ‘5वां वार्षिक स्पिरिट ऑफ ह्यूमैनिटी अवार्ड’
तमिलनाडु नेत्र चिकित्सक संघ द्वारा ‘सामुदायिक नेत्र चिकित्सा व्याख्यान सम्मान’ प्राप्त हुआ।
वर्ष 2016 में उन्हें ‘डॉ. जे. एल. शर्मा अवार्ड’, इंडियन सोसाइटी ऑफ कॉर्निया एंड केराटो-रिफ्रैक्टिव सर्जन्स द्वारा ‘लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड’,
‘पद्मश्री प्रोफेसर. टी. पी. लहाने ओरिएंटेशन अवार्ड’ से सम्मानित किया गया।
2017 में उन्हें विजन 2020 का ‘श्री एस. एन. शाह पुरस्कार’,
IIRIS वार्षिक सम्मेलन में ‘लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड’,
MSICS को बढ़ावा देने के लिए ‘एक्सीलेंस इन ऑप्थाल्मोलॉजी अवार्ड’ प्राप्त हुआ।
2018 में उन्हें AIOS द्वारा ‘लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड’
2019 में ‘भारत भूषण सम्मान’ से सम्मानित किया गया।
भगवान महावीर फाउंडेशन, चेन्नई द्वारा 24वां ‘महावीर पुरस्कार’ प्रदान किया गया।
डॉ. गुल्लापल्ली राव एंडोवमेंट अवार्ड’ भी प्राप्त हुआ।
2023 में इंडियन जर्नल ऑफ ऑप्थाल्मोलॉजी (IJO) द्वारा उन्हें “भारतीय नेत्र चिकित्सा के जीवित किंवदंती (Living Legend in Indian Ophthalmology)” के रूप में मान्यता दी गई, और उनके सम्मान में पत्रिका ने अपना मुखपृष्ठ और एक विशेष संपादकीय उन्हें समर्पित किया।
2025 अप्रैल में गुजरात आयुर्वेद विश्वविद्यालय जामनगर द्वारा डी.लिट् की मानद उपाधि दी गयी
2025 मई में इंडियन विजनरी अवार्ड से गोल्डन स्पैरो संसथान ने पुरुस्कृत किया गया
चिकित्सा के क्षेत्र में पद्मश्री 27 मई 2025 महामहिम राष्ट्रपति जी द्वारा सम्मानित किया गया और जून 2025 में हिपोक्रेट्स लगेसी अवार्ड से दिल्ली में पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया द्वारा नवाजा गया। वहीं डॉ जैन की धर्म पत्नी ऊषा जैन भी मानव सेवा,गौ सेवा और महिलाओं को आत्म निर्भर बनाने के काम अपनी सेवा संस्थान में महिला, शिक्षा समिति की अध्यक्षा के रूप में देती है, डॉ जैन दो पुत्रों के पिता थे बड़े पुत्र जिनेश जैन है और छोटे डॉ इलेश जैन है, डॉ इलेश जैन श्री सदगुरु सेवा संघ के ट्रस्टी एवं वर्तमान में सदगुरु नेत्र चिकित्सालय जानकीकुंड चित्रकूट के सी ई ओ है। डॉ जैन की दो बहुएं बड़ी श्रुति जैन छोटी मौसम जैन है, डॉ जैन के तीन पौत्र और एक पौत्री है प्रियांश जैन, निर्वाण जैन,अर्णव जैन और अरिहा जैन।( मीडिया प्रभारी वीरेंद्र शुक्ला की )

ReferralCodeLLVR11
previous arrow
next arrow
WhatsAppImage2024-06-13at1242061
previous arrow
next arrow
WhatsAppImage2025-06-11at40003PM
previous arrow
next arrow
WhatsAppImage2024-10-20at41111PM1
previous arrow
next arrow
WhatsAppImage2023-04-17at53854PM4
previous arrow
next arrow
Home
Live TV
VIDEO NEWS
Verified by MonsterInsights