गरमाई सियासत: पूर्व मंत्री आबिद रजा ने रुदायन पीड़ितों की कानूनी लड़ाई लड़ने का किया ऐलान

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बदायूँ। जनपद की सियासत एक बार फिर गर्मा गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव एवं पूर्व मंत्री आबिद रजा ने इस्लामनगर क्षेत्र के रुदायन कस्बे में पीड़ित तीन मुस्लिम युवकों की कानूनी लड़ाई अपने खर्चे पर लड़ने का सार्वजनिक ऐलान किया है। इस घोषणा के बाद राजनीतिक हलको में हलचल तेज हो गई है।

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रुदायन काण्ड के पीडित तीनों युवक आज पूर्व मंत्री आबिद रजा के आवास पर पहुँचे क्योंकि जिले में उन्हें आबिद रजा पर पूरा भरोसा है कि वह उनकी मदद करेगें और उन्होंने अपने साथ हुई घटना का विस्तार से विवरण दिया। मदद की गुहार लगाई। युवकों का आरोप है कि कुछ दिन पहले ये रुदायन कस्बे में गए थे, जहां आरोपी ने उन्हें सड़क पर दौड़ा-दौड़ा कर पीटा। इतना ही नहीं, उनकी टोपी उतरवाई गई, आधार कार्ड और पहचान पत्र देखे गए और सार्वजनिक रूप से अपमानित किया गया।

पूर्व मंत्री आबिद रजा ने पीड़ितों से पूरा घटनाक्रम सुना और वरिष्ठ अधिवक्ताओं के पैनल के साथ बैठक कर कानूनी रणनीति तैयार की। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन और पुलिस सत्तारूढ़ दल के दबाव में निष्पक्ष कार्रवाई नहीं करती है तो वे अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे और आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित कराएंगे।

उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, ‘आप लोग डरे नहीं। हम हमेशा पीड़ित, मजलूम और शोषित के साथ खड़े रहें हैं। आज पीड़ित मुस्लिम हैं, कल अगर कोई हिन्दू इसी तरह अन्याय का शिकार होगा तो हम उसकी भी उसी मजबूती से मदद करेंगे।

प्रशासन की भूमिका पर उठाये सवाल।

आबिद रज़ा ने पुलिस कार्यवाही पर भी सवाल खड़े किये उनका आरोप हैं कि पुलिस ने आरोपी के खिलाफ सामान्य धाराओं मे रिपोर्ट दर्ज कर केवल औपचारिकता निभाई हैं। उन्होंने तीखे अंदाज़ मे पूछा अगर कोई मुस्लिम इस तरह अमानवीय व्यवहार करता तो क्या पुलिस इतनी ही नरमी दिखाती? पहले हाफ एनकाउंटर होता, फिर जेल भेजा जाता और बुलडोज़र भी चल चुका होता। इन पीड़ितों का मात्र इतना दोष हैं क़ि वह मुस्लिम हैं, इसलिए भाजपा खेमे मे ख़ामोशी हैं, किसी जनप्रतिनिधि या नेता का आज तक बयान नहीं आया।

आबिद रज़ा ने कहा प्रयागराज मे शंकराचार्य जी के साथी साधु संतो का अपमान, कभी रुदायन मे दाड़ी टोपी वालो का अपमान, कभी बरेली मे चर्च पर ईसाई समाज का अपमान कोई सुरक्षित नहीं हैं। “सबका साथ सबका विकास” का नारा देने वाले लोग ऐसी घटनाओं पर खामोश क्यूँ हैं? सत्ताधारी पार्टी को अपनी चार साल की नाकामी के कारण हिन्दू वोट खिसकता नजर आ रहा हैं, इसलिए इस तरह के घटिया हथकण्डे से धार्मिक उन्माद पैदा करके हिन्दू वोट को अपने पक्ष मे लाने की नाकाम कोशिश कर रहें हैं।

उन्होंने आगे कहा कि क्या उत्तर प्रदेश में कानून और बुल्डोजर भी अब जाति, धर्म और पहनावे को देखकर काम कर रहे हैं? यदि ऐसा है तो यह लोकतंत्र और संविधान की आत्मा के खिलाफ है।

पूर्व मंत्री ने तीनों पीड़ितों को मीडिया के सामने प्रस्तुत करते हुए सार्वजनिक रूप से घोषणा की कि वे अपने निजी संसाधनों से पीड़ित लोगों की कानूनी लड़ाई लड़ेंगे। उन्होंने कहा कि न्याय मिलने तक वे पीछे नहीं हटेंगे।

पीडित युवकों ने मीडिया को बताया कि उन्हें सड़क पर सार्वजनिक रूप से अपमानित किया गया, धार्मिक पहचान के आधार पर निशाना बनाया गया और पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। उनका कहना है कि वे भय और असुरक्षा के माहौल में जी रहे हैं।

पूर्व मंत्री आबिद रजा ने भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रदेश में हिंदू-मुस्लिम की नफरती राजनीति को हवा दी जा रही है। उन्होंने जनता से अपील की कि वे ऐसी राजनीति से सावधान रहें और कानून के राज की मांग करें।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर नागरिक को समान अधिकार और सुरक्षा मिलनी चाहिए। यदि किसी समुदाय के साथ भेदभाव होता है तो यह पूरे समाज के लिए खतरे की घंटी है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पूर्व मंत्री आबिद रजा का यह कदम न केवल पीड़ितों को कानूनी सहायता देने का प्रयास है, बल्कि एक सशक्त राजनीतिक संदेश भी है।

पूर्व मंत्री का स्पष्ट कहना है कि यदि न्याय नहीं मिला तो वे अदालत में मजबूती से पैरवी करेंगे और आरोपियों को सजा दिलाकर रहेंगे।

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