वोटर लिस्ट विवाद में सीईसी ज्ञानेश कुमार पर महाभियोग की मांग, विपक्ष एकजुट होता दिखा
पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट में सुधार को लेकर शुरू हुआ विवाद अब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग की मांग तक पहुंच गया है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सीईसी पर आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने की मांग की है। अब कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और शिवसेना (यूबीटी) समेत कई विपक्षी दल उनके समर्थन में सामने आते दिख रहे हैं। कांग्रेस ने कहा है कि इस मुद्दे पर पूरा विपक्ष मिलकर फैसला करेगा। कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने कहा कि विपक्ष सामूहिक रूप से मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने पर विचार कर रहा है। उन्होंने ममता बनर्जी द्वारा उठाए गए मुद्दे को प्रासंगिक बताया और कहा कि तृणमूल कांग्रेस ने इस संबंध में कांग्रेस से संपर्क किया है। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने भी ममता बनर्जी का समर्थन करते हुए कहा कि वोट छिनना अधिकार छिनने जैसा है और यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी के काले कारनामों के खिलाफ ममता बनर्जी संघर्ष कर रही हैं और समाजवादी पार्टी उनके साथ है। वहीं इस मामले पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। शिवसेना (यूबीटी) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने चुनाव आयोग की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि बड़े पैमाने पर वोटरों के नाम हटाए जा रहे हैं, जिससे उनके अधिकारों का हनन हो रहा है। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी इस मुद्दे को सुप्रीम कोर्ट तक ले गई हैं, जो एक सकारात्मक कदम है और इससे चुनाव आयोग की विश्वसनीयता बनी रहनी चाहिए। यह पूरा विवाद पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची में सुधार के विशेष अभियान से जुड़ा है, जिसका ममता बनर्जी लगातार विरोध कर रही हैं। उनका आरोप है कि इस प्रक्रिया के जरिए तृणमूल कांग्रेस समर्थकों के नाम गलत तरीके से वोटर लिस्ट से हटाए जा रहे हैं। इसी सिलसिले में उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त से मुलाकात की थी, लेकिन बैठक के दौरान रवैये से नाराज होकर उन्होंने वॉकआउट किया और बाद में महाभियोग की मांग तेज कर दी।













































































