टीईटी की अनिवार्यता के खिलाफ शिक्षकों ने सौंपा ज्ञापन
बरेली। माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा सेवा में बने रहने के लिए दो वर्ष में टीईटी अनिवार्य किए जाने के आदेश के विरोध में सोमवार को उत्तर प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ की जिला इकाई बरेली के सैकड़ों शिक्षक जिला कलेक्ट्रेट पहुंचे प्रधानमंत्री, केंद्रीय शिक्षा मंत्री व मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन प्रशासनिक अधिकारी को सौंपा। शिक्षकों ने ज्ञापन में कहा कि 29 जुलाई 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को आरटीई एक्ट से मुक्त रखा गया था, लेकिन 3 अगस्त 2017 को हुए संशोधन के बाद सभी शिक्षकों पर टीईटी अनिवार्य कर दिया गया। इसके संबंध में प्रभावित शिक्षकों को न कोई नोटिस और न ही अधिसूचना जारी की गई। अब सर्वोच्च न्यायालय के देशव्यापी निर्णय से उत्तर प्रदेश के करीब ढाई लाख शिक्षकों के सामने रोज़गार संकट खड़ा हो गया है। संघ का कहना है कि विभिन्न समय पर अलग-अलग मानकों के आधार पर हुई भर्तियों में कई शिक्षक ऐसे हैं जो टीईटी की पात्रता ही नहीं रखते। सभी पर इसे लागू करना न केवल बेसिक शिक्षा विभाग की छवि को प्रभावित करेगा बल्कि शिक्षण व्यवस्था को भी बाधित करेगा। शिक्षक प्रतिनिधियों ने मांग की कि 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से मुक्त रखा जाए और इस संबंध में आवश्यक संशोधन कर शिक्षकों को मानसिक तनाव से बचाया जाए। ज्ञापन कार्यक्रम में प्रांतीय महिला उपाध्यक्ष बीना, मंडल अध्यक्ष डॉ. विनोद कुमार शर्मा, जिलाध्यक्ष मानवेंद्र सिंह, महामंत्री तेजपाल मौर्य, कोषाध्यक्ष काशीराम सहित मीनाक्षी, कल्पना, अमिता, रेखा गुप्ता, मीरा यादव, राजेश कुमार शर्मा, अरविन्द सिंह, राकेश कुमार, विनोद चौधरी, हेमन्त कुमार, प्रियंका, जमशेद अनवर, पोथी राम, पंकज सिंह, राजेश मिश्रा, सीमा सक्सेना, महेंद्र सिंह गुर्जर, डी.पी. सिंह, मो. सलीम, सुशील कुमार, रेनू गुप्ता, जितेन्द्र सिंह, समीर कुमार, उमा देवी, महावीर विश्वकर्मा, डी.पी. यादव, दीपा गुप्ता, प्रीति शर्मा, आशा राणा, रजी हसन, विपिन संख्यधर, राकेश उपाध्याय, विजय कुमार, नरेन्द्र कुमार मौर्य सहित बड़ी संख्या में शिक्षक मौजूद रहे।













































































