रामभद्राचार्य बोले – राम जन्मभूमि जीत ली, अब विश्व में राम जी को सबसे ज्यादा सम्मान प्राप्त

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 मेरठ। विक्टोरिया पार्क में जगद्गुरु पीठाधीश्वर रामभद्राचार्य ने कहा कि भगवान विष्णु के नौ अवतार में श्रीराम का प्रभाव रहा। श्रीराम जन्म हुआ तो प्रभाव और स्वभाव दोनों ही भक्तों ने देखा। रावण ने भी भगवान राम की प्रशंसा की। भगवान का स्वभाव हर किसी के हृदय में बस गया। उन्होंने कहा कि अपनी 1406 वीं कथा मेरठ की ऐतिहासिक भूमि पर कर रहा हूं। मेरठ में प्रथम स्वतंत्रता संग्राम अलख जगी। हम राम जन्म भूमि जीत चुके हैं। अब विश्व स्तर पर राम जी का सर्वाधिक सम्मान है।

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कथा से पूर्व भारी बारिश के कारण विक्टोरिया पार्क में हर तरफ जलभराव हो गया। कथा शाम चार बजे आरंभ होनी थी। कथा स्थल पर पहुंचे 100 से अधिक भक्त उनके आने की प्रतीक्षा में कथा स्थल पर रहे। ऐसे में शाम 6:51 पर कथा स्थल पर भक्तों सूचना दी गई कि श्रीराम कथा का वर्णन होगा। ऐसे में हर तरफ श्री राम की जय जयकार गूंज उठी। महाराज जी को गाड़ी में बैठाकर स्टेज और फिर व्यासपीठ तक पहुंचाया गया।कथा आरंभ होते ही हर तरफ श्री सीता राम, हनुमान जी की जय जयकार हुई। चरण पादुका पूजन तक भक्तों की संख्या लगातार बढ़ती रही। संस्कृत में मंत्रोचारण किया गया। यजमानों ने महाराज का माल्यार्पण कर स्वागत किया गया। जगद्गुरु पीठाधीश्वर श्री रामभद्राचार्य ने गणपति जग नंदन, शंकर सुवन केसरी नंदन भजन के साथ श्री राम, गणेश जी और हनुमान जी का गुणगान किया। सीता राम, जय सीता राम शब्दों को सुनकर हर कोई आनंदित हो गया।

मेडिकल कॉलेज, यूनिवर्सिटी का दिया उदाहरण


श्रीराम भद्राचार्य ने मेरठ के मेडिकल कॉलेज और सीसीएस यूनिवर्सिटी का उदाहरण देते हुए गीता का संदेश बताया। उन्होंने कहा कि गीता में अर्जुन ने श्रीकृष्ण से आध्यात्म के विषय में पूछा। उन्होंने कहा गलत आदत स्वभाव बन जाती है। ऐसे में आत्म चिंतन करना चाहिए। जीवआत्मा को यह समझना चाहिए।

राम मित्र और शत्रु को देते हैं आनंद


कथा व्यास जी ने कहा कि भगवान श्रीराम मित्र और शत्रु दोनों को आनंद देते हैं। शत्रु भी श्रीराम की प्रशंसा करते हैं। उन्होंने अंगद और रावण के बीच हुए संवाद के विषय में बताते हुए कहा कि रावण ने तब भी श्रीराम की प्रशंसा ही की थी। उन्होंने कहा कि राम तो किसी से बैर नहीं रखता है तो लड़ेगा कैसे।

राक्षस भी हो गए राम भक्त


रावण ने युद्ध के दौरान कुछ राक्षसों को श्रीराम का भेद जानने के लिए भेजा। जब राक्षस उनके पास पहुंचे तो भगवान का स्वभाव देखकर नतमस्तक हो गए। उनके सभी अवगुण खत्म हो गए और वह कपट भूल गए। प्रभु के स्वभाव ने वानरों के दिलों में भी परिवर्तन ला दिया। इस बीच उन्होंने देवताओं के राजा इंद्र के पुत्र जयंत का भी प्रसंग सुनाया। भजन गाते हुए उन्होंने कहा कि स्वभाव राम का चुंबक है, अपनों को भी भावुक कर देता है।

विक्टोरिया पार्क से निकाली गई कलश यात्रा


विक्टोरिया पार्क से सुबह श्रीराम कथा कलश यात्रा निकाली गई। यात्रा में महिलाएं सिर पर कलश लेकर पीतांबर वस्त्र धारण कर चल रही थीं। यात्रा में शहर के दो प्रसिद्ध बैंड ने धार्मिक प्रस्तुति दी। यात्रा विक्टोरिया पार्क से आरंभ होकर सूरजकुंड स्थित बाबा मनोहरनाथ मंदिर पहुंची। मंदिर में 18 भुजी देवी मां की पूजा अर्चना महामंडलेश्वर मां निलिमानंद जी ने कराई। सूक्ष्य जलपान के बाद महिलाएं वापस कथा स्थल पर पहुंची और कलश स्थापित किए गए। इस अवसर पर डॉली गुप्ता, शालिनी अग्रवाल, कादंबरी कौशिक, साधना शर्मा, कविता अग्रवाल, पायल गुप्ता, राधा सिंघल, डॉ. शैली गुप्ता रहीं।

सुनील भराला ने लिया गुरु जी से आशीर्वाद
भाजपा नेता सुनील भराला ने बताया कि श्रीरामभद्राचार्य जी से आशीर्वाद प्राप्त किया। भराला ने बताया कि गुरु जी को अंग वस्त्र और पुष्प गुच्छ दिया। उन्होंने बताया कि गुरुदेव का व्यक्तित्व हर किसी को प्रेरणा देता है। ज्ञान, धर्म और वह स्वयं ही सभी शक्तियों से परिपूर्ण हैं।

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