उझानी : आज से पितृपक्ष की शुरुआत हो गई है, जो 21 सितंबर तक चलेगा। इस दौरान पितरों को जल अर्पित करने का विशेष महत्व है। आज सुबह से कछला गंगा घाट पर श्रृद्धालुओं की भीड़ लगी हुई है। कछला गंगा घाट पहुंचे लोगों ने सुबह स्नान कर तिल, अक्षत, द्रव्य, फूल और कुश लेकर सूर्य के समक्ष पितरों को जल अर्पण किया । तर्पण करते वक्त सभी ने दक्षिण दिशा की ओर मुख कर तर्पण किया क्योंकि यह दिशा पितरों की मानी जाती है । श्रृद्धालुओं ने पितरों को जल देते समय अंगूठे के माध्यम से सूर्य देव के समक्ष अपने पूर्वजों को याद कर पुरोहित द्वारा मंत्रोच्चारण कर जल अर्पित किया। आज सूर्य ग्रहण होने के चलते दोपहर लगभग 12 बजे से सूतक काल लगने के कारण भी सुबह से श्रृद्धालुओं के आने का सिलसिला शुरू हो गया। मान्यता है कि पितृपक्ष में पितरों को जल अर्पित करने से उनकी आत्मा को शांति मिलती है और वे अपने वंशजों को आशीर्वाद देते हैं। इस दौरान पितरों के निमित्त श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान किया जाता है, जिससे पितरों की आत्मा को तृप्ति मिलती है!