आम के बागों की दुर्दशा पर भाकियू (टिकैत) ने सौंपा ज्ञापन, सरकार से की राहत की मांग

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बरेली। आम की खेती करने वाले किसानों की दुश्वारियों को लेकर भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के कार्यकर्ताओं ने सोमवार को जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन सौंपा। यूनियन ने आम के बागवानों की बदहाल स्थिति को रेखांकित करते हुए तत्काल राहत और संरक्षित नीति की मांग की। ज्ञापन में बताया गया कि आम के बागों का अस्तित्व गंभीर संकट में है। पेड़ों में चेपा, भुनका, तना भेदक जैसे रोग तेजी से फैल रहे हैं, जिससे वर्षों से पले-पढ़े पेड़ सूखकर नष्ट हो रहे हैं। महंगी दवाएं और बार-बार स्प्रे के बावजूद कीट नियंत्रण में नहीं आ रहे। आम का बाजार भाव बेहद कम है—2023 और 2024 में 10 रुपये प्रति किलो तक आम बेचना पड़ा, जिससे किसानों को कोई लाभ नहीं हुआ। वर्ष 2025 में आम की वहार खरीदने को कोई व्यापारी भी नहीं मिल रहा है। किसानों ने सरकार से मांग की है कि आम की फसल को भी समर्थन मूल्य योजना में शामिल किया जाए और न्यूनतम मूल्य 60 रुपये प्रति किलो तय कर सरकारी खरीद शुरू की जाए। साथ ही, हर बाग को गोद लेकर वैज्ञानिकों द्वारा नियमित निरीक्षण कर मुफ्त दवा व स्प्रे की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। आम की बहार और पेड़ों का बीमा अनिवार्य किया जाए ताकि प्राकृतिक आपदा या रोग से हुई क्षति की भरपाई की जा सके। ज्ञापन में जंगली जानवरों, आवारा पशुओं, बंदरों व बकरियों द्वारा बागों को नुकसान पहुंचाने की बात भी प्रमुखता से रखी गई। यूनियन ने मांग की कि तारबंदी, झटका मशीन, शूटिंग परमिट जैसी सुरक्षात्मक व्यवस्थाएं सरकार अपने खर्चे पर या भारी सब्सिडी पर उपलब्ध कराए। वहीं, कीटनाशकों की सरकारी दरों पर उपलब्धता, ट्रैक्टर व स्प्रे मशीन की सुविधा और बागवानी संबंधी जागरूकता अभियान भी चलाने की मांग की गई। यूनियन ने चेतावनी दी है कि अगर मांगों पर शीघ्र अमल नहीं हुआ तो आंदोलन किया जाएगा।

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