साध्वी प्राची का ममता सरकार पर हमला: हिन्दुओं पर अत्याचार को बताया साजिश, वक़्फ संशोधन कानून पर केंद्र सरकार को धन्यवाद
बरेली के सर्किट हाउस पहुँची विश्व हिंदू परिषद की फायरब्रांड नेता साध्वी प्राची ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में हिन्दुओं के साथ हो रहे अत्याचार कोई संयोग नहीं बल्कि एक गहरी साजिश का हिस्सा हैं, जिसमें राज्य सरकार की भूमिका संदिग्ध है। साध्वी प्राची ने अपने भाषण में हिन्दुओं पर हो रहे हमलों को ‘राजनीतिक प्रायोजित हिंसा’ बताया और कहा कि यह ममता सरकार की तुष्टीकरण की नीति का नतीजा है। साध्वी प्राची ने कहा, “पश्चिम बंगाल की भूमि पर हिन्दू अब सुरक्षित नहीं हैं। ममता बनर्जी की सरकार वोट बैंक की राजनीति में इस कदर लिप्त है कि वह खुलेआम हिन्दुओं की आस्था, उनके त्योहारों, और धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला होने दे रही है।” उन्होंने आरोप लगाया कि दुर्गा विसर्जन से लेकर रामनवमी की शोभायात्राओं तक, हर हिन्दू पर्व पर पाबंदियाँ लगाई जा रही हैं जबकि दूसरी तरफ अल्पसंख्यकों को खुलेआम छूट दी जा रही है। वक़्फ संशोधन कानून को बताया “ऐतिहासिक कदम” अपने संबोधन में साध्वी प्राची ने हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा पारित वक़्फ संशोधन कानून को ‘ऐतिहासिक’ बताया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का आभार प्रकट करते हुए कहा कि यह कानून उन कट्टरपंथियों और उनके समर्थकों के लिए करारा जवाब है जो वर्षों से वक़्फ बोर्ड का दुरुपयोग कर रहे थे। साध्वी ने कहा, “देश की संपत्तियों को वक़्फ की आड़ में कब्जाने का षड्यंत्र अब बेनकाब हो चुका है। यह कानून न सिर्फ हिन्दुओं को न्याय देगा, बल्कि भारत की एकता और अखंडता को भी मजबूत करेगा। वर्षों से चली आ रही एकतरफा नीतियों का अंत अब शुरू हो गया है।” उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष इस कानून का विरोध करके यह साबित कर रहा है कि वह तुष्टीकरण की राजनीति से अब भी बाहर नहीं निकल पाया है। “जो दल इस कानून का विरोध कर रहे हैं, वह असल में कट्टरपंथियों के साथ खड़े हैं, न कि संविधान के साथ,” उन्होंने कहा। जनसंख्या नियंत्रण कानून की माँग साध्वी प्राची ने देश में जनसंख्या नियंत्रण कानून लाने की माँग को भी जोरदार तरीके से उठाया। उन्होंने कहा कि भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश के लिए यह कानून अब एक ‘अनिवार्यता’ बन चुका है। “अगर समय रहते कठोर जनसंख्या नियंत्रण कानून नहीं लाया गया, तो देश की सामाजिक संरचना और संसाधनों पर भारी दबाव पड़ सकता है,” उन्होंने चेताया। उनका कहना था कि जनसंख्या असंतुलन समाज में वैमनस्य फैलाता है और इससे देश की आंतरिक सुरक्षा भी खतरे में पड़ सकती है। उन्होंने दो बच्चों की नीति को लागू करने की वकालत की और कहा कि इस नीति को धर्म, जाति या समुदाय से ऊपर उठकर लागू किया जाना चाहिए। तुष्टीकरण की राजनीति पर हमला साध्वी प्राची ने अपने भाषण में तुष्टीकरण की राजनीति को देश के लिए ‘विष समान’ बताया। उन्होंने कहा कि कुछ राजनीतिक दल सिर्फ वोट के लिए देश की संस्कृति, सभ्यता और धार्मिक मूल्यों से समझौता कर रहे हैं। उन्होंने पश्चिम बंगाल के साथ-साथ केरल और असम का भी उल्लेख करते हुए कहा कि इन राज्यों में भी हिन्दुओं को दबाने की कोशिशें हो रही हैं। उन्होंने जनता से आग्रह किया “यह समय है कि भारतवासी एकजुट होकर उन ताकतों को परास्त करें जो इस देश की आत्मा को बांटना चाहती हैं,” उन्होंने कहा। नारी शक्ति और राष्ट्रवाद साध्वी प्राची ने नारी शक्ति और राष्ट्रवाद के मुद्दे को भी उठाया। उन्होंने कहा कि भारत की नारियाँ अब जाग चुकी हैं और वह सिर्फ घर तक सीमित नहीं हैं। “हमें अब ऐसी पीढ़ी तैयार करनी है जो धर्म, देश और संस्कृति की रक्षा के लिए तत्पर रहे। हमारे बच्चे मंदिर जाएँ, शास्त्र पढ़ें, और इतिहास की सच्चाई जानें,” उन्होंने कहा। उन्होंने यह भी जोड़ा कि हिन्दू महिलाओं को स्वयं की रक्षा के लिए शस्त्र प्रशिक्षण लेना चाहिए ताकि वे किसी भी आपात स्थिति में स्वयं की रक्षा कर सकें। साध्वी प्राची ने केवल ममता बनर्जी सरकार की आलोचना तक सीमित रहा, बल्कि इसमें राष्ट्रहित, सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा, जनसंख्या नियंत्रण, और धार्मिक स्वतंत्रता जैसे कई ज्वलंत मुद्दों को भी उठाया गया। वक़्फ संशोधन कानून को लेकर उनका केंद्र सरकार को समर्थन और जनसंख्या नियंत्रण कानून की माँग आने वाले समय में हिन्दू संगठनों के एजेंडे को और तेज कर सकती है। यह स्पष्ट है कि साध्वी प्राची जैसे नेताओं का उद्देश्य सिर्फ सरकारों की आलोचना नहीं, बल्कि एक वैचारिक आंदोलन को धार देना है—एक ऐसा आंदोलन जो राष्ट्र, धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए जागरूकता पैदा कर रहा है।













































































