उर्से सकलैनी कुल शरीफ़ में लाखों सकलैनियो की उमड़ी भीड़

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बरेली। रबिउस्सानी बरोज़ बुध उर्से सकलैनी के आखिरी दिन की शुरुआत सुबह बाद नमाज़ फज्र कुरआन ख्वानी से हुई। सुबह 8 बजे ख़ानक़ाह शरीफ़ के मेहमान खाने में तकरीरी महफिल का आग़ाज़ हुआ, महफिल तिलावते कलामे पाक से शुरू की गई। प्रोग्राम के खुसूसी आलिम हज़रत अल्लामा मुख्तार अशरफ़ साहब ने किब्ला पीरो मुरशिद मियां हुज़ूर की जीवन शैली आपकी सादगी, परहेजगारी से अकीदतमंदों को रूशनास (अवगत) कराया, उन्होंने कहा कि अल्लाह ने मियां हुज़ूर को वो इज़्ज़त और शान अता की कि जिनकी खामोशी ने पूरी दुनिया में इंकलाब बरपा कर दिया, पूरी दुनिया में आपने इस्लाम व सिलसिले का परचम बुलंद किया, किब्ला मियां हुज़ूर की सादगी, इंकिसारी व खुशमिज़ाजी से लोग इतना मुतास्सिर हुए कि लोग आप पर फिदा हुए बगैर नहीं रह सके। अल्लामा मौलाना प्रोफेसर मेहमूद उल हसन साहब ने अपने ब्यान में कहा कि, आज हम लोगों को तरह-तरह से परेशान किया जा रहा है हम पर ज़ुल्म किए जा रहे हैं, हमारे पूर्वजों का खुलेआम अपमान किया जा रहा है , हमारे सब्र का इम्तिहान लिया जा रहा है और अफसोस की बात ये है कि कुछ आपस के लोग ऐसे भी हैं जिन्होंने मुखालिफत और हमारे प्रोग्राम को खत्म कराने में कोई कसर नहीं छोड़ी, ऐसे लोगों की सोच और उनकी साज़िशों पर शर्म आती है जो अपने ज़मीर से बिलकुल गिर चूके हैं, उन्होंने लोगो को हिदायत की हमारे सब्र और इम्तिहान का वक्त है इसलिए आपस में इत्तिहाद, मोहब्बत, सब्र के साथ रहें किसी भी तरह की बद-अम्नी का मुज़ाहिरा न करें। प्रोग्राम में कुल शरीफ़ के मौक़े पर खास तौर से हज़रत सादकैन सकलैनी, हज़रत असलम मियां वामिकी, अल्लामा आबिद सकलैनी, अल्लामा शाहिद शेख़, मौलाना रिफाक़त सकलैनी, मौलाना मुफ्ती फ़हीम सकलैनी, हाफ़िज़ गुलाम गौस, मौलाना मुख्तार तिलहरी, हमज़ा सकलैनी, इंतिखाब सकलैनी, मुनीफ सकलैनी, सलमान सकलैनी, हज़रत मुहिब्ब मियां, ज़िया राशिद, हाजी लतीफ़, हाफ़िज़ आमिल, हसीब सकलैनी आदि मौजूद रहे।

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प्रोग्राम के बाद सलात ओ सलाम हुआ और ठीक 11 बजे कुल शरीफ़ की फातिहा की गई, कुल शरीफ़ की फातिहा साहिबे सज्जादा हज़रत शाह मोहम्मद गाज़ी मियां ने पढ़ी। कुल शरीफ़ के मुबारक मौक़े पर ख़ानक़ाह शरीफ़ के सज्जादा नशीन हज़रत अल्हाज गाज़ी मियां हुज़ूर ने उर्स में आए सभी ज़ायरीन के नेक तमन्नाओं की हुसूल के लिए दुआएं की और खुसूसी तौर पर मुल्क व शहर के अमन व सुकून के लिए दुआ की और क़ौम की सलामती व तरक्की के लिए खुसूसी दुआएं कराईं। अपने पीरो मुरशिद के पहले उर्स में शिरकत करने की लिए मुरीदों (सकलैनियों) की भीड़ एक बार फिर बरेली में देखने को मिली, कुल में उमड़ी लाखों की भीड़ से शहर की रफ़्तार थम गई, 11 बजे कुल की रस्म में धीरे-धीरे भीड़ सैलाब की तरह उमड़ने लगी, दरगाह शरीफ़ के आस-पास कोहाडापीर, नैनीताल रोड, कुतुबखाना, कुमार टाकीज, जाटव पुरा चौराहा आदि प्रमुख चौराहे ज़ायरीन की भीड़ से पूरे पैक हो गए और पूरा शहर का यातायात रुक सा गया, दरगाह की तंग गलियों में ज़ायरीन की भीड़ से बेशुमार लोग दबे कुचले और भगदड़ जैसे स्तिथि भी कई बार बनी, कई बुजुर्ग और बच्चे भीड़ में दबे जिनको दरगाह के वोलेंटियर्स ने बचाया। इस साल उर्से सकलैनी की अनुमति न मिल पाने की वजह से उर्स में बड़ा डिस्टर्ब रहा, काफी समस्याओं का सामना करना पड़ा, जायरीन को बड़ी असुविधा हुई, पुलिस फोर्स और ज़ायरीन के वाहनों की पार्किंग के लिए कोई व्यवस्था नहीं हो पाई जिस कारण बड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ा, उर्स दरगाह पर ही किया गया और बड़े अमन व शांति के साथ उर्स संपन्न हो गया। उर्स में ज़ायरीन की देख-भाल व सुविधा के लिए दरगाह की ओर से एक हज़ार वॉलेंटियर्स बनाए गए थे जिन्होंने अपनी जिम्मेदारियों को बड़ी खूबी से निभाया, चार पांच किलोमीटर दूर तक वोलेंटियर्स ने अपनी ड्यूटी को पूरा किया। उर्स में अच्छी व्यवस्था बनाए रखने के लिए दरगाह की ओर से इंतजामिया कमेटी बनाई गई जिसने उर्स में सभी व्यवस्थाओं को अच्छे तरीके से संपन्न कराने में अपना खास योगदान दिया, इंतजामिया कमेटी में मुकीत सकलैनी, गौस सकलैनी, निज़ाम सकलैनी, मन्ना सकलैनी, मुंतासिब सकलैनी, मुनीफ सकलैनी, इंतिखाब अहमद, इंतज़ार हुसैन, हाजी लतीफ़ सकलैनी, अशफाक सकलैनी, अबरार सकलैनी, अरशद खान सकलैनी, फैसल सकलैनी, सय्यद राशिद, जमील सकलैनी, मोहसिन आलम, जाहिद सकलैनी, खुर्रम सकलैनी, शावेज़ सकलैनी, अकरम सकलैनी आदि लोगों ने उर्स व्यवस्था में अपना खास योगदान दिया। दरगाह के मीडिया प्रभारी एवम् प्रवक्ता मोहम्मद हमज़ा सकलैनी ने कहा कि उर्स की परमिशन न होने की वजह से काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा, मुरीदीन अपने पीर ओ मुरशिद केस उर्स में बड़ी मोहब्बत व आस्था के साथ शामिल हुए, उर्स एक धार्मिक आस्था का पर्व है, ये लोगों की आस्थाओं व अकीदत का मुआमला है, इससे किसी को रोका नहीं जा सकता, हमने किसी भी जायरीन को दावत नहीं दी न हुक्नेकोई प्रेस वार्ता की, लेकिन पीर से आस्था रखने वाले लोग खुद अपनी आस्था और मर्ज़ी से आए हैं उनकी आस्थाओं का सम्मान रखना हमारी जिम्मेदारी है। पुलिस प्रशासन ने हमारे उर्स को गंभीरता से नहीं लिया और आपेक्षित सहयोग नहीं मिल सका, पार्किंग के लिए भी बड़ी दिक्कतें हुई और हमारे ज़ायरीन के खड़े वाहनों के चालान भी किए गए, हमने ये उर्स बड़े दबाव में किया है। पुलिस प्रशासन के इस रवैय्ये पर हम हैरत हुई खैर हम इसके बावजूद भी पुलिस प्रशासन का शुक्रिया अदा करते हैं।

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