कोटरा बाबा धाम पर तृतीय गीता जयंती और तुलसी दिवस बड़े धूमधाम से मनाया

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-ब्राह्मणों और क्षेत्रवासियों ने कार्यक्रम में ज्योति प्रज्वलित कर की पूजा-अर्चना

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वृंदावन से आए अनन्ताचार्य जी महाराज ने बताया तुलसी और श्रीमद् गीता का महत्व।

वज़ीरगंज। जहां एक ओर पूरे देश में पश्चिम सभ्यता का त्यौहार क्रिसमस डे मनाया जा रहा है, वहीं कोटरा बाबा धाम पर देश की संस्कृति और संस्कारों को बचाने के उद्देश्य से तृतीय गीता जयंती और तुलसी दिवस का आयोजन किया गया।
सर्व प्रथम सैकड़ों क्षेत्रवासीयों ने मिलकर तुलसी जी का पूजन किया। उसके उपरांत वृंदावन से आए अनन्ताचार्य जी महाराज ने तुलसी दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि ज़्यादातर हिंदू परिवारों में तुलसी की पूजा की जाती है। इसे सुख और कल्याण के प्रतीक के तौर पर देखा जाता है। लेकिन धार्मिक महत्व के अलावा तुलसी को एक औषधि के रूप में भी प्रयोग किया जाता है। इसका इस्तेमाल कई बीमारियों के इलाज के लिए किया जाता है। सर्दी-खांसी से लेकर कई बड़ी-बड़ी बीमारियों में भी तुलसी एक कारगर औषधि है। आयुर्वेद में तुलसी के विभिन्न औषधीय गुणों का एक विशेष स्थान है। तुलसी को संजीवनी बूटी के समान भी माना जाता है।

वही विनोद शास्त्री ने कहा कि हमें अपने बच्चों को अच्छे से अच्छे संस्कार देना चाहिए, क्योंकि संस्कार जीवन पर्याप्त साथ रहते हैं और समाज में मान सम्मान दिलाते हैं।

बाद में विलुप्त होते गीता जयंती के त्यौहार को भी पूजा अर्चना कर मनाया गया। पूजन के उपरांत शिवदास गुरूजी ने क्षेत्र से आए सेकड़ों महिलाओं, बच्चों और पुरुषों को गीता के श्लोकों की व्याख्या कर कलयुग में गीता के महत्व पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण और अर्जुन के बीच हुआ यह संवाद ही श्रीमद्भगवद गीता है। इस उपदेश के दौरान ही भगवान श्री कृष्ण अर्जुन को अपना विराट रूप दिखलाकर जीवन की वास्तविकता से उनका साक्षात्कार करवाते हैं। तब से लेकर अब तक गीता के इस उपदेश की सार्थकता बनी हुई है। श्रीकृष्‍ण के उपदेशों के बाद अर्जुन का मोह भंग हो गया और उन्‍होंने गांडीव धारण कर शत्रुओं का नाश कर फिर से धर्म की स्‍थापना की।

इस मौके पर अरुण शर्मा ने कहा कि इस तरह के आयोजनों से हमारी लुप्त हो रही संस्कृति को बचाया जा सकता है। क्रांतिकारी शिवओम शंखधार ने कहा श्रीमदगीता हिंदुओं का पवित्र ग्रंथ है। और य‍ह व‍िश्‍व का इकलौता ऐसा ग्रंथ है जिसकी जयंती मनाई जाती है। समापन के उपरांत क्षेत्र वासियों को प्रसाद का वितरण किया गया।

इस अवसर पर आयोजक देवेश शंखधार, शशिकांत शास्त्री, तालेबर सिंह, गौरव शंखधार, सुमित वार्ष्णेय, कुलदीक शर्मा, अनिल शर्मा, शिवम मिश्रा, विनोद चौहान, शीलू मिश्रा, प्रदीप चौहान, रामबाबू शर्मा आदि अनेकों श्रद्धालु गण मौजूद रहे।

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