ठंड में हो सकती हैं आंखें ड्राई

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स्वास्थ्य। बढ़ता प्रदूषण और ठंडा मौसम, दोनों ही वजहों से हमारी आंखें ड्राई हो जाती है। हवा में मौजूद प्रदूषक आपकी आंखों के लिए हानिकारक हो सकते हैं। इस वजह से, आंखें ड्राई होने लगती है। साथ ही, ठंड के मौसम में हवा शुष्क होती है, जो आंखों को ड्राई बनाती है। इस समस्या को ड्राई आई सिंड्रोम कहा जाता है। इससे बचाव करने से पहले यह जानना जरूरी है कि यह होता क्या है। आइए जानते हैं क्या है ड्राई आई सिंड्रोम, इसके लक्षण और बचाव के तरीके। क्लीवलैंड क्लीनिक के मुताबिक, ड्राई आई सिंड्रोम एक ऐसी कंडिशन है, जिसमें आंखों की आंसुओं की परत (Tear Film) प्रभावित होती है। टीयर फिल्म आंखों को सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक होती है। आंसुओं की परत में दिक्कत आने की वजह से आंखों को देखने में तकलीफ हो सकती है। आंखों में आंसुओं का न बनना या जल्दी सूखने की वजह से यह समस्या होती है। इस कारण से आंखों में जलन, खुजली या धुंधला दिखने जैसी कई आंखों की समस्या हो सकती है।

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क्या होते हैं इसके लक्षण?

  • आंखों में जलन
  • आंखों में चुभन
  • धुंधला दिखना
  • रोशनी से तकलीफ होना
  • आंखों में म्युकस आना
  • आंखें खुली रखने में तकलीफ होना
  • आंखों में खुजली होना
  • आंखों का लाल होना
  • अधिक आंसु आना

कैसे करें इससे बचाव?

ब्रेक लें- अधिक समय तक फोन या लैपटॉप की स्क्रीन पर देखने की वजह से आंखों की टियर फिल्म प्रभावित हो सकती है। इसलिए, अगर आपको बहुत समय तक स्क्रीन पर देखना पड़ता है, तो बीच-बीच में थोड़ी देर के लिए ब्रेक लेकर अपनी आंखों को रेस्ट करने दें।

प्रदूषण से बचें- हवा में मौजूद हानिकारक प्रदूषक तत्वों की वजह से आंखें ड्राई हो सकती हैं। इसलिए, आंखों को प्रदूषण से बचाकर रखना बहुत जरूरी है। इसलिए बाहर निकलते समय चश्मे का इस्तेमाल करें ताकि प्रदूषण आपकी आंखों में कम जाए।

ह्यूमिडिफायर- सर्दियों के मौसम में हवा शुष्क हो जाती है, जिस वजह से आंखें भी ड्राई होने लगती है। इससे बचने के लिए अपने कमरों में ह्यूमिडिफायर का इस्तेमाल करें। इससे आपकी आंखों की नमी बरकरार रहेगी।

स्मोकिंग से दूर रहें- स्मोक करने से या सिग्रेट के धुएं में रहने से आंखों पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए, स्मोकिंग न करें और सकेंड हैंड स्मोक से भी दूर रहें।

डॉक्टर से मिलें- आंखों की ड्राईनेस की समस्या अगर ठीक नहीं हो रही है, तो डॉक्टर से संपर्क करें। वे आपकी आंखों की कंडिशन को समझ कर, उसका बेहतर इलाज कर पाएंगे।

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