देश में कल 1 अप्रैल से 45+ उम्र वालों को लगेगी कोराना वैक्सीन

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भोपाल।’ देश में 1 अप्रैल से कोविड वैक्सीनेशन के फेज 3 की शुरुआत हो रही है. केंद्र सरकार ने इसी वजह से 45 वर्ष से ज्यादा उम्र के लोगों को हाई रिस्क ग्रुप में रखा है और 1 अप्रैल से इस एज ग्रुप के सभी लोगों को कोविड वैक्सीन लगाई जाएगी. मध्य प्रदेश में इस एज ग्रुप के 1.18 करोड़ लोग हैं जिनका वैक्सीनेशन होना है. साल 2011 की जनगणना के आधार पर हुए कैल्कुलेशन के मुताबिक 2021 में 60+ की आबादी 13.7 करोड़ और 45 से 59 वर्ष की आबादी 20.7 करोड़ है. यानी दूसरे और तीसरे फेज में मिलाकर करीब 34 करोड़ लोगों को वैक्सीनेट किया जाना है. दूसरा चरण की शुरुआत 1 मार्च से हो चुकी है.

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कोविड वैक्सीनेशन के लिए ऐसे कराएं रजिस्ट्रेशन
कोरोना का टीका लगवाने के लिए आपको cowin.gov.in पोर्टल या Co-WIN ऐप ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराना होगा. आरोग्य सेतु ऐप के जरिए भी आप रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं. आप कोविड वैक्सीनेशन सेंटर पर जाकर शाम 3 बजे के बाद अपना रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं और तुरंत टीका लगवा सकते हैं. लेकिन आप निर्धारित एज ग्रुप के होने चाहिए. ऑनलाइन या कोविड वैक्सीनेशन सेंटर पर रजिस्ट्रेशन के लिए पहचान पत्र जैसे आधार कार्ड या वोटर कार्ड जरूरी है. आप पासपोर्ट, राशनकार्ड या फिर बैंक पासबुक को भी पहचान पत्र के तौर पर पेश कर सकते हैं.

अब तक 6.30 करोड़ वैक्सीन डोज लग चुके हैं
देश में कोरोना वैक्सीनेशन की शुरुआत 16 जनवरी से हुई थी. 30 मार्च तक 6.30 करोड़ डोज लग चुके हैं. सबसे पहले हेल्थकेयर वर्कर्स को वैक्सीनेट किया गया, इसमें 82 लाख को पहला डोज और 52 लाख को दूसरा डोज दिया जा चुका है. 2 फरवरी से फ्रंटलाइन वर्कर्स का वैक्सीनेशन शुरू हुआ था. अब तक 90 लाख  फ्रंटलाइन वर्कर्स को पहला और 38 लाख को दूसरा डोज दिया जा चुका है. 

1 मार्च से 60 वर्ष से ज्यादा, यानी सीनियर सिटिजन्स का वैक्सीनेशन शुरू हुआ था. अब तक 2.90 करोड़ सीनियर सिटिजन्स को पहला और 36,899 को दूसरा डोज दिया जा चुका हे. इसके अलावा केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से लिस्टेड 20 बीमारियों में से कोई एक बीमारी होने पर 45 से 59 वर्ष के लोगों को वैक्सीन देना शुरू किया गया था. अब तक ऐसे 72 लाख कैंडिडेट्स को पहला डोज और 4,905 को दूसरा डोज दिया गया है.

कोरोना वैक्सीन के दो डोज के बीच कितना अंतर?
भारत में कोवीशील्ड और कोवैक्सिन का इस्तेमाल ​हो रहा है. कोवीशील्ड को यूके की दवा कंपनी एस्ट्राजेनेका ने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर विकसित किया है. पुणे की सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया इसका प्रोडक्शन और सप्लाई कर रही है. कोवैक्सिन को हैदराबाद स्थित कंपनी भारत बॉयोटेक ने इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वॉयरोलॉजी पुणे के साथ मिलकर बनाया है. कोवैक्सिन के दो डोज में 28 दिन का अंतर रखा जा रहा है. 

वहीं, केंद्र सरकार ने हाल ही में कोवीशील्ड के दो डोज के बीच का अंतर चार हफ्ते से बढ़ाकर 6 से 8 हफ्ते किया है. विशेषज्ञों के मुताबिक कोविड वैक्सीन का पहला डोज लगने के 7-10 दिन बाद शरीर में एंटीबॉडीज बनने लगती हैं. तीन से चार हफ्ते बाद ये एक्टिवेट हो जाती हैं. वैक्सीन का दूसरा डोज बूस्टर का काम करता है और शरीर में एंटीबॉडीज का लेवल 4 से 6 गुना बढ़ा देता है.

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