स्वास्थ्य। देशभर में लगे पटाखों पर बैन के बावजूद लोगों ने जमकर पटाखों के साथ दिवाली मनाई और अब इसका असर वातावरण में देखने को मिल रहा है। दिवाली के बाद से ही दिल्ली-एनसीआर समेत देश के कई हिस्सों में हवा का स्तर बेहद खराब हो चुका है। ऐसे में जहरीली हवा में सांस लेने की वजह से कई स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ गया है। क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) इन्हीं में से एक है। यह एक गंभीर बीमारी है, जिसके प्रति जारूकता फैलाने के मकसद से हर साल वर्ल्ड सीओपीडी डे मनाया जाता है। यह दिन हर साल नवंबर के तीसरे बुधवार को मनाया जाता है। इस मौके पर इस बीमारी के बारे में विस्तार से जानने और के इसके कनेक्शन के बारे में विस्तार से जानने के लिए हमने मैक्स हॉस्पिटल गुड़गांव के पल्मोनोलॉजी विभाग के वरिष्ठ सलाहकार और एचओडी डॉ. नेविन किशोर से बातचीत की। डॉक्टर के मुताबिक वायु प्रदूषण क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण जोखिम कारक है। वायु प्रदूषक एल्वियोलर लेवल पर को नुकसान पहुंचाते हैं। एल्वियोली वह थैली होती हैं, जहां कार्बन डाइऑक्साइड और ऑक्सीजन गैस का एक्सचेंज होता है। ऐसे में वायु प्रदूषण के बढ़ते स्तर की वजह से इन एल्वियोली को नुकसान हो सकता है, जो सीओपीडी का कारण बनता है। सूक्ष्म कण यानी फाइन पर्टिकुलेट मैटर (पीएम2.5) और अन्य प्रदूषक फेफड़ों में अंदर तक प्रवेश कर सकते हैं, जिससे एयरवेज में सूजन और जलन हो सकती है। हवा में मौजूद इन प्रदूषकों के लंबे समय तक संपर्क में रहने से ऑक्सीडेटिव तनाव और फेफड़ों के टिशूज को नुकसान हो सकता है। खासतौर पर पहले से रेस्पिरेटरी संबंधी समस्याओं वाले व्यक्ति वायु प्रदूषण के हानिकारक प्रभावों के प्रति ज्यादा संवेदनशील होते हैं।