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जन्मभूमि बदायूँ में ‘वाटर वुमन’ शिप्रा पाठक ने जेल में हरियाली के साथ जगाई सुधार की नई उम्मीद

June 12, 2026By admin0 comments
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बदायूँ। पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप देने वाली देश की चर्चित पर्यावरण कार्यकर्ता एवं ‘वाटर वुमन’ ने अपनी जन्मभूमि बदायूँ पहुंचकर जिला कारागार में एक प्रेरणादायक और मानवीय पहल को नई दिशा दी। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर शुरू किए गए “हरित जेल अभियान” के अंतर्गत उन्होंने जिला कारागार परिसर में पौधारोपण किया तथा कैदियों के साथ संवाद स्थापित कर उन्हें जीवन में सकारात्मक परिवर्तन और प्रकृति से जुड़ने की प्रेरणा दी।कार्यक्रम के दौरान जेल अधीक्षक राजेंद्र कुमार के साथ मिलकर वाटर वुमन ने शमी का पौधा रोपित किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि पौधे केवल पर्यावरण संरक्षण का माध्यम नहीं हैं, बल्कि जीवन में धैर्य, सकारात्मकता और पुनर्निर्माण की भावना का भी प्रतीक हैं। उन्होंने जेल परिसर को हरित एवं सकारात्मक ऊर्जा से भरने का संदेश देते हुए कहा कि प्रकृति से जुड़ाव व्यक्ति के विचारों और व्यवहार में भी सकारात्मक परिवर्तन लाता है।
वाटर वुमन ने जेल में मौजूद कैदियों को संबोधित करते हुए कहा कि जीवन में हुई गलतियों को स्वीकार कर सुधार की दिशा में आगे बढ़ना ही सच्चा प्रायश्चित है। उन्होंने भावुक शब्दों में कहा कि “आप सभी कभी देश के भविष्य का हिस्सा थे, लेकिन परिस्थितियों और कुछ गलत निर्णयों ने आपको इस पिंजरे तक पहुंचा दिया। फिर भी हर व्यक्ति को स्वयं को बदलने और समाज में सम्मानपूर्वक लौटने का अवसर मिलना चाहिए।”उन्होंने कैदियों को पंचतत्व संस्था द्वारा उपलब्ध कराए जाने वाले बीज, खाद और मिट्टी के माध्यम से पौधे तैयार करने के लिए प्रेरित किया। उनका कहना था कि पौधों की सेवा केवल पर्यावरण संरक्षण नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और समाज के प्रति सकारात्मक योगदान का भी माध्यम है। उन्होंने कैदियों से आग्रह किया कि वे पौधारोपण को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं और जेल परिसर को हरियाली से भरने में सक्रिय भूमिका निभाएं।कार्यक्रम की विशेष बात यह रही कि वाटर वुमन ने केवल औपचारिक संबोधन तक स्वयं को सीमित नहीं रखा, बल्कि कैदियों के बीच बैठकर उनसे संवाद किया और उनके लिए भोजन बनाने में भी सहयोग दिया। इस पहल ने जेल परिसर में मौजूद लोगों के बीच आत्मीयता और मानवीय संवेदनाओं का अनूठा वातावरण तैयार किया। कैदियों ने भी उत्साहपूर्वक इस अभियान में सहभागिता जताते हुए पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया।
गौरतलब है कि वाटर वुमन देशभर में पर्यावरण संरक्षण के लिए लगातार सक्रिय हैं। अब तक वह लगभग 13 हजार किलोमीटर की पदयात्रा कर चुकी हैं और अपनी संस्था पंचतत्व के माध्यम से करीब 30 लाख लोगों को पर्यावरण अभियान से जोड़ने का कार्य कर रही हैं। उनका लक्ष्य 58 लाख पौधे लगाने का है। इसी उद्देश्य से वह देश की विभिन्न जेलों में जाकर “हरित जेल अभियान” के तहत पंचतत्व शमी वाटिकाओं की स्थापना कर रही हैं।इससे पूर्व गाजियाबाद, मुजफ्फरनगर, मेरठ और मुरादाबाद की जेलों में भी शमी वाटिकाएं स्थापित की जा चुकी हैं। बदायूँ जिला कारागार इस श्रृंखला की एक महत्वपूर्ण कड़ी बना, जहां पौधारोपण के साथ-साथ कैदियों के मन में सुधार, आत्मविश्वास और नई शुरुआत की उम्मीद का भी बीजारोपण हुआ।वाटर वुमन के इस प्रेरणादायक अभियान ने यह संदेश दिया कि पर्यावरण संरक्षण केवल पेड़ लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज के हर वर्ग को जोड़ने, जिम्मेदारी का बोध कराने और सकारात्मक बदलाव की दिशा में आगे बढ़ने का सशक्त माध्यम भी है। बदायूँ में उनका यह कार्यक्रम हरित भविष्य और मानवीय संवेदनाओं का सुंदर संगम बनकर सामने आया।

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