छत्तीसगढ़ के कोंडागांव का “हर्बल इस्टेट” बना देश की किसान-राजनीति का प्रमुख केंद्र”

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छत्तीसगढ़। आगामी चुनावों में “एमएसपी गारंटी कानून” सबसे बड़ा मुद्दा, जिसके लिए देश के सभी किसान संगठन हैं एकमत। ऑर्गेनिक बोर्ड बनाने तथा बस्तर में हर्बल एवं विलेज टूरिज्म को बढ़ावा देने की सलाह, हिमाचल प्रदेश अच्छा उदाहरण। डॉक्टर राजाराम त्रिपाठी के नवाचारों तथा विशेषज्ञता का व्यापक किसान हित में फायदा उठाने में सरकारें फेल।डॉक्टर राजाराम त्रिपाठी की हेलीकॉप्टर द्वारा बस्तर के जलते हुए जंगल तथा खेतों की बीमारी पर संपूर्ण नियंत्रण की अनूठी योजना को सरकार द्वारा तत्काल सब्सिडाइज करने की मांग। हर खेत तक पानी पहुंचाना सबसे जरूरी, तेलगाना से सीख सकती है प्रदेश सरकार, साथ ही बस्तर के अंदरूनी क्षेत्रों के जनजातीय समुदायों की समस्याओं पर तत्काल ध्यान देने की जरूरत। एनजीटी के 10 साल के बाद डीजल के ट्रैक्टर और वाहनों को कबाड़ घोषित करने की नीति को भी लिया आढे हाथ और कहा कि यह नीति अव्यवहारिक है और पर्यावरण के बहाने केवल ऑटोमोबाइल के मालिकों को फायदा दिलाने के लिए है। देश के अग्रिम पंक्ति के जुझारू किसान नेता राकेश टिकैत राष्ट्रीय प्रवक्ता भाकियू,, प्रवीण श्योकंद प्रदेश प्रभारी भाकियू छत्तीसगढ़, कृष्णा नरवाल, प्रदीप पांडेय आदि प्रदेश व देश के लगभग एक दर्जन वरिष्ठ किसान नेता बुधवार की शाम छत्तीसगढ़ के कोंडागांव में डॉक्टर राजाराम त्रिपाठी के निवास ‘हर्बल इस्टेट’ पर पहुंचे, इस अवसर पर “मां दंतेश्वरी हर्बल” परिसर के “बईठका- कक्ष” में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस को दिग्गज किसान नेता राकेश टिकैत तथा अखिल भारतीय किसान महासंघ (आईफा) के राष्ट्रीय संयोजक डॉक्टर राजाराम त्रिपाठी के द्वारा संयुक्त रूप से संबोधित किया गया। प्रेस कांफ्रेंस में राकेश टिकैत ने कहां कि देश का पहला अंतर्राष्ट्रीय सर्टिफाइड ऑर्गेनिक फार्म” 1996 से छत्तीसगढ़ में है, और यहां जैविक खेती की अपार संभावनाएं हैं, इसलिए यहां पर तत्काल ‘ऑर्गेनिक बोर्ड’ बनाया जाना चाहिए। आश्चर्यजनक है कि डॉक्टर राजाराम त्रिपाठी के नवाचारों तथा विशेषज्ञताओं से प्रेरणा लेकर भूटान जैसे देशों ने अपने आप को संपूर्ण जैविक देश घोषित कर दिया तथा अन्य कई प्रदेशों व देशों के प्रगतिशील किसान यहां से सीख कर बहुत अच्छा काम कर रहे हैं, परंतु प्रदेश तथा केंद्र सरकारें किसानों के व्यापक हित में डॉक्टर राजाराम त्रिपाठी के अनुभवों नवाचारों का समुचित लाभ नहीं उठा रही हैं। राकेश टिकैत ने बस्तर में हर्बल एवं विलेज टूरिज्म को बढ़ावा देने की सलाह देते हुए हिमाचल प्रदेश का उदाहरण दिया। इस अवसर पर डॉक्टर राजाराम त्रिपाठी द्वारा हेलीकॉप्टर खरीदने के सवाल के जवाब में राकेश टिकैत ने उल्टा सवाल किया कि क्यों भाई भारत का किसान हेलीकॉप्टर क्यों नहीं खरीद सकता? आगे उन्होंने कहा कि पहली बात तो यह कि हम सभी किसानों को गर्व है कि हमारे देश का किसान अपना हेलीकॉप्टर खुद उड़ानें जा रहा है। दूसरी महत्वपूर्ण बात यह है कि हेलीकॉप्टर द्वारा बस्तर के जलते हुए जंगल तथा खेतों की बीमारी पर संपूर्ण नियंत्रण की डॉक्टर राजाराम त्रिपाठी की अनूठी योजना के लिए वो उन्हें बधाई देते हैं, हम सब सरकार से मांग करते हैं सरकार डॉक्टर राजाराम त्रिपाठी के हेलीकॉप्टर योजना को तत्काल सब्सिडाइज किया जाय। राकेश टिकैट ने कहा कि हर किसान के खेत तक पानी पहुंचाना सरकार का सबसे जरूरी काम है, प्रदेश सरकार इसे तेलंगाना से सीख सकती है। बस्तर के अंदरूनी क्षेत्रों के जनजातीय समुदायों की समस्याओं पर भी तत्काल ध्यान देने की जरूरत है। प्रेस कांफ्रेंस में डॉक्टर राजाराम त्रिपाठी ने कहा कि आगामी चुनावों में न्यूनतम समर्थन मूल्य गारंटी हेतु सक्षम कानून लाने का मुद्दा सबसे प्रमुख मुद्दा है। इस मुद्दे पर लगभग ढाई सौ किसान संगठनों ने मिलकर “एमएसपी गारंटी मोर्चा” बनाया हुआ है। इसके राष्ट्रीय अध्यक्ष सरदार वीएम सिंह है। डॉक्टर राजाराम त्रिपाठी जो कि इस मोर्चे के राष्ट्रीय प्रवक्ता भी है ने कहा कि एक “सक्षम एसपी गारंटी कानून” लाने के मुद्दे पर देश के सारे किसान संगठन तथा किसान एकमत हैं। अखिल भारतीय किसान महासंघ (आईफा) के 45 साथी किसान संगठन भी एमएसपी गारंटी कानून के मुद्दे पर एक साथ कटिबद्ध हैं। “एमएसपी गारंटी नहीं तो वोट नहीं” तथा माल हमारा, भाव तुम्हारा अब नहीं चलेगा किनारे अब गांवों की गलियों में गूंज रहे हैं। इस संदर्भ में राकेश टिकैत ने कहा कि तराजू भी तुम्हारा और भाव भी तुम्हारा यह अब आगे नहीं चल पाएगा। सरकार मुगालते में ना रहे की किसान संगठनों को तोड़कर अपनी मनमानी कर पाएगी। राकेश टिकैत ने एनजीटी के 10 साल के बाद डीजल के ट्रैक्टर और वाहनों को कबाड़ घोषित करने की नीति को भी आढे हाथों लिया और कहा कि यह नीति अव्यवहारिक है, और केवल ऑटोमोबाइल के बड़े व्यापारियों को फायदा दिलाने के लिए इसे लाया गया है। इस अवसर पर स्थानीय मीडिया के साथियों के साथ के अलावा मां दंतेश्वरी हर्बल समूह के किसान साथियों की उपस्थिति भी महत्वपूर्ण रही। उल्लेखनीय है कि लगभग 10 दिन पूर्व ही प्रदेश के लगभग एक दर्जन किसान-नेताओं का दल भी कोंडागांव के “मां दंतेश्वरी हर्बल फार्म तथा रिसर्च सेंटर भ्रमण तथा प्रदेश और देश की खेती किसानी की प्रमुख मुद्दों पर चर्चा हेतु हर्बल इस्टेट आया था।

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(दीपक कुमार त्यागी / हस्तक्षेप
स्वतंत्र पत्रकार)

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