संत निरंकारी मिशन द्वारा प्रोजेक्ट अमृत के अंतर्गत “स्वच्छ जल स्वच्छ मन” परियोजना का शुभारम्भ

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सहसवान (बदायूं) संत निरंकारी मिशन द्वारा आजादी के 75वें अमृत महोत्सव ‘ के अवसर पर सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज एवं निरंकारी राजपिता जी के पावन सानिध्य में दिनांक 26 फरवरी, दिन रविवार को ‘अमृत परियोजना’ के अन्तर्गत ‘स्वच्छ जल स्वच्छ मन ’ का शुभारम्भ किया जायेगा। इसी कड़ी में 26 फ़रवरी को सहसवान के एतिहासिक सरसोता झील में भी स्वच्छता अभियान चलाया जाएगा जहां ब्रांच सहसवान से लगभग 100 निरंकारी सेवादार व श्रद्धालु भक्त हिस्सा लेंगे । स्वच्छता अभियान सुबह 8 बजे से 12 बजे तक आयोजित किया जाएगा । इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य ‘जल संरक्षण’ तथा इसके बचाव हेतु अपनायी जाने वाली विभिन्न गतिविधियों की योजना बनाना एवं उन्हें क्रियान्वित रूप देना है। इस परियोजना का मुख्य बिंदू जल निकायों की स्वच्छता एवं स्थानीय जनता के बीच ‘जागरूकता आभियान’ के माध्यम से उन्हें प्रोत्साहित करना है। बाबा हरदेव सिंह जी द्वारा समाज कल्याण हेतु जीवनपर्यन्त अनेक कार्य किए गए जिसमें स्वच्छता एवं वृक्षारोपण अभियान का आरंभ प्रमुख है और उन्ही की शिक्षाओं से प्रेरणा लेते हुए प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष संत निरंकारी मिशन द्वारा निरंकारी सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज के निर्देशन में ‘अमृत परियोजना ‘ का आयोजन किया जा रहा है । संत निरंकारी मिशन के सचिव श्री जोगिंदर सुखीजा जी ने इस परियोजना संबंधित विस्तृत जानकारी दी कि यह परियोजना संपूर्ण भारत वर्ष के लगभग 1100 स्थानों के 730 शहरों, 27 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में विशाल रूप से आयोजित की जाएगी जिनमें मुख्यता: आंध्र प्रदेश,अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह, असम,बिहार, चंडीगढ़, छत्तीसगढ़,दमन और दीव,दिल्ली,गुजरात, गोवा,हरियाणा,हिमाचल प्रदेश,जम्मू और कश्मीर,झारखंड, कर्नाटक,केरल, मध्य प्रदेश,महाराष्ट्र, ओडिशा,पंजाब, राजस्थान,तमिलनाडु,तेलंगाना,त्रिपुरा, उत्तरप्रदेश,उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल इत्यादि सम्मिलित है । इस परियोजना में निरंकारी मिशन के करीब 1.5 लाख स्वयंसेवक अपने सहयोग द्वारा ‘ जल संरक्षण और जल निकायों’ जैसे समुद्र तट,नदियां,झीलें,तालाब,कुएं,पोखर, जोहड़,विभिन्न झरनों,पानी की टंकियों,नालियों और जल धाराओं इत्यादि को स्वच्छ एवं निर्मल बनाएंगे । मिशन की लगभग सभी शाखाएं इस अभियान में सम्मिलित होंगी और आवश्यकता पड़ने पर अलग-अलग शाखाएं भी निर्दिष्ट क्षेत्रों में सामूहिक रूप से इन सभी गतिविधियों में अपना योगदान देंगी । ‘अमृत परियोजना ‘ के अन्तर्गत भारत के दक्षिणी क्षेत्रों के मुख्य तटबंधो की स्वच्छता जिनमें सूरत, मुंबई से लेकर गोवा तक का कोकण बेल्ट,मालाबार तट के कर्नाटक,केरल की तटीय रेखाओं और अरब सागर के पश्चिमी घाट की सीमा को तथा कोरोमंडल तट के दक्षिण पूर्वी तटीय क्षेत्रों को स्वयंसेवकों की टीमों द्वारा कवर किया जाएगा । इसके अतिरिक्त पूर्व में बंगाल की खाड़ी और दक्षिण में कावेरी डेल्टा को भी कवर किया जाएगा । इस अभियान में प्रमुख नदियों को भी सम्मिलित किया गया है जिसमें मुख्यता: उत्तरी क्षेत्र से ब्यास, गंगा, यमुना और घाघरा; केंद्रीय क्षेत्र से चंबल, बेतवा,नर्मदा, कृष्णा, ताप्ती, सोन नदी ; पश्चिमी क्षेत्र से साबरमती, माही, तवा; पूर्वी क्षेत्र से महानदी, गोदावरी और दक्षिणी क्षेत्र से कृष्णा, कावेरी, कोल्लीडम इत्यादि प्रमुख है । समुद्र तटों एवं नदियों की

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स्वच्छता हेतु प्रयोग की जाने वाली प्रणालियां :-

प्राय: प्राकृतिक जल निकायों वाले क्षेत्रों में पाया जाने वाला प्लास्टिक कचरा, अपशिष्ट पदार्थ, झाड़ियां, अपशिष्ट खाद्य पदार्थों को हटाकर समुद्र तटों, घाटों एवं नदियों के किनारों की सफाई मिशन के स्वयंसेवकों द्वारा को जायेगी ।

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